


1999 में रिकॉर्ड नष्ट करने की एंट्री
कोर्ट के रिकॉर्ड रूम के रजिस्टर की जांच में पता चला कि उक्त मुकदमे की पत्रावली को 4 सितंबर 1999 को नष्ट किए जाने के रूप में दर्ज किया गया है। हालांकि, न्यायिक रिकॉर्ड से जुड़े नियमों के अनुसार मुख्य केस फाइल यानी ‘फाइल-ए’ को स्थायी रूप से सुरक्षित रखा जाना चाहिए।





जांच में सामने आएगा रिकॉर्ड कैसे हुआ गायब
मुकदमे का निष्पादन 13 जुलाई 1977 को तत्कालीन द्वितीय अपर अधीनस्थ न्यायाधीश एच. नारायण की अदालत में हुआ था। इसके बाद रिकॉर्ड को सिविल रिकॉर्ड रूम में संरक्षित किया गया था।
अब पुलिस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि स्थायी रूप से सुरक्षित रखी जाने वाली फाइल आखिर रिकॉर्ड रूम से कैसे गायब हुई, 1999 में उसे नष्ट किए जाने की प्रविष्टि किस आधार पर की गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
कोर्ट प्रशासन ने रिकॉर्ड गायब होने के पीछे किसी को अनुचित लाभ पहुंचाने या महत्वपूर्ण साक्ष्य हटाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया है। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
