रांची: संगठित अपराध, चोरी की स्कूटी और बाइक लूट के मामले में जेल में बंद दो आरोपियों मो. शाकिब और मो. अली को अदालत से बड़ी राहत मिली है। अपर न्यायायुक्त शैलेंद्र कुमार की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले के जांच अधिकारी अभियोजन के आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के जरिए साबित करने में असफल रहे। ऐसे में संदेह का लाभ आरोपियों को दिया जाना उचित है।
मामला 2 अक्टूबर 2024 का है। पुलिस के अनुसार, कडरू स्थित हनुमान मंदिर के पास वाहन जांच के दौरान बिना नंबर प्लेट वाली स्कूटी पर सवार मो. शाकिब और मो. अली को पकड़ा गया था। तलाशी के दौरान स्कूटी की डिक्की से चार अलग-अलग नंबर प्लेट और एक काला मास्क बरामद होने का दावा किया गया था। पुलिस ने दोनों को संगठित अपराध गिरोह का सदस्य बताते हुए गिरफ्तार किया था।
हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि बरामद नंबर प्लेट चोरी के वाहनों से संबंधित थीं। कथित फर्जी दस्तावेज भी अदालत में पेश नहीं किए गए। इसके अलावा जब्ती सूची में किसी स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी भी नहीं थी, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए।
जिरह के दौरान जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि बरामद स्कूटी मो. शाकिब की पत्नी के नाम पर पंजीकृत थी। वहीं अभियोजन पक्ष यह भी साबित नहीं कर सका कि दोनों आरोपी किसी संगठित आपराधिक गिरोह से जुड़े हुए थे।
इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने माना कि आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सके। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश दिया गया।


