33 साल बाद भी ईईएफ फैक्ट्री के कर्मचारियों को नहीं मिला पूरा हक, अब भी है इंतजार

रांची की इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट फैक्ट्री बंद हुए 33 साल बाद भी सैकड़ों पूर्व कर्मचारी बकाया वेतन और पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। न्याय की उम्मीद अब भी कायम है।

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रांची: कभी पूरे देश में ट्रांसफॉर्मर, इलेक्ट्रिक मोटर और अन्य विद्युत उपकरणों की आपूर्ति करने वाली टाटासिलवे स्थित ‘इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट फैक्ट्री’ (ईईएफ) आज बंद पड़ी है और इसके सैकड़ों पूर्व कर्मचारी 33 वर्षों से अपने बकाया वेतन और पेंशन का इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 1993 में फैक्ट्री बंद होने के बाद से कर्मचारी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन न्याय की उम्मीद में कई कर्मचारी इस दुनिया से चले गए, जबकि बचे हुए बुजुर्ग न्याय की अंतिम आस लगाए बैठे हैं।

1968 में शुरू हुई थी यह फैक्ट्री

फैक्ट्री के इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 1961-62 में करीब 135 एकड़ भूमि अधिग्रहित कर 1968 में इसका निर्माण शुरू हुआ था और 1971 से उत्पादन शुरू हुआ। यह इकाई बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम (बीएसआईडीसी) के अधीन संचालित थी। यहां बने ट्रांसफॉर्मर और इलेक्ट्रिक मोटर न केवल बिहार बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे कई राज्यों के सरकारी उपक्रमों को सप्लाई किए जाते थे।

1993 में लगा ताला, शुरू हुआ न्याय का संघर्ष

वर्ष 1993 में अचानक प्रबंधन ने इस फैक्ट्री में ताला लगा दिया और लगभग 600 कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया। इसके बाद कर्मचारियों ने अपने हक के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। इस संघर्ष के बीच झारखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 2023 में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 476 कर्मचारियों को बकाया वेतन देने का आदेश दिया। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें बकाया वेतन की केवल आधी राशि (मूल वेतन के आधार पर) ही दी गई है, जबकि पीएफ, ग्रेच्युटी, इंक्रीमेंट और अन्य बकाया भत्तों का भुगतान अब भी अधूरा है।

बीआरएस योजना और अधूरी वादे

वर्ष 2022 में प्रबंधन ने कर्मचारियों के लिए बीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) योजना लागू की, जिसके तहत 49 कर्मचारियों को हटा दिया गया। पूर्व कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें केवल आश्वासन दिए गए, लेकिन वास्तविक सुविधाएं और बकाया राशि पूरी तरह नहीं दी गई। यहां तक कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मृत्यु के बाद उनके परिजनों को भी ईपीएफ और पेंशन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। वर्तमान में यह मामला फिर से उच्च न्यायालय में लंबित है। अदालत ने इस मामले पर 17 सितंबर, 2026 को अगली सुनवाई की तिथि तय की है। सालों से बकाया राशि और न्याय का इंतजार कर रहे बुजुर्ग पूर्व कर्मचारियों को उम्मीद है कि अदालत से उन्हें अपना बचा हुआ पूरा हक और वित्तीय राहत मिल सकेगी।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।