
रांची: राजधानी रांची में खाद्य जनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्ट्रीट फूड और सड़क किनारे लगने वाली दुकानों की जांच अभियान तेज कर दिया है। इस बार विभाग का सबसे बड़ा फोकस दुकानों में इस्तेमाल किए जा रहे पानी की गुणवत्ता पर है। जांच के दौरान विभिन्न फूड स्टॉल से पानी के सैंपल एकत्र कर प्रयोगशाला भेजे गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खाने-पीने की चीजों में इस्तेमाल होने वाला पानी सुरक्षित है या नहीं। बता दे कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट पानी के सैंपल कलेक्ट कर रहा है।
मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब की मदद से शहर के प्रमुख बाजारों, स्कूलों के आसपास, फूड हब और रोडसाइड दुकानों की जांच की जा रही है। निरीक्षण के दौरान पानी के सैंपल भी लिए गए। अधिकारियों का कहना है कि मौके पर सीमित जांच संभव होती है, इसलिए विस्तृत रिपोर्ट के लिए नमूनों को लैब भेजा गया है। क्योंकि कई बार रोड साइड लगने वाली दुकानों में जिस पानी का इस्तेमाल खाने की चीजों में किया जाता है वह गंदा होता है या फिर चापानल या टंकी के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे कि लोगों को फूड प्वाइजनिंग होने का खतरा बढ़ जाता है।
फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ. पवन कुमार ने बताया कि दूषित पानी खाद्य संक्रमण का सबसे बड़ा कारण बन सकता है। यदि खाना बनाने, बर्तन धोने या पेय पदार्थ तैयार करने में अस्वच्छ पानी का इस्तेमाल होता है तो लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी वजह से इस अभियान में पानी की गुणवत्ता की विशेष निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि कई बार जार का पानी भी पीने लायक नहीं होता। कारोबार करने के लिए वाटर प्लांट वाले नॉर्मल पानी जार में भरकर सप्लाई कर देते हैं। कई बार तो छाप नल का पानी भरकर भी दुकानों में डिलीवरी कर दी जाती है।

