हरमू बायपास रोड के पास नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ अभियान के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग

हरमू बायपास रोड पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने सड़क जाम कर विरोध जताया, पुनर्वास, बच्चों की पढ़ाई और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग उठाई।

News Aroma
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची : राजधानी रांची में जारी अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच मंगलवार को हरमू बायपास रोड के पास कार्रवाई को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। नगर निगम की कार्रवाई में लंबे समय से बसे कई परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया गया। घर टूटने के बाद प्रभावित परिवार सड़क पर उतर आए और विरोध में सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव के समय नेता उनके घरों तक वोट मांगने पहुंचते हैं, लेकिन जब उनके आशियाने उजाड़े जा रहे हैं तो उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई के बाद पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि मंगलवार को त्योहार का दिन है और कई महिलाएं उपवास पर थीं। इसी दौरान उनके घरों को तोड़ने की कार्रवाई की गई। महिलाओं ने कहा कि घर उजड़ने के बाद अब उनके सामने परिवार के साथ रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। वहीं, इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने की चिंता भी सामने आई। प्रदर्शन में शामिल बच्चियों ने कहा कि वे पढ़-लिखकर अपने भविष्य में कुछ करना चाहती हैं, लेकिन घर टूट जाने के बाद पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो सकता है। परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ने के कारण उन्होंने पढ़ाई छूटने की आशंका भी जताई।

इसी दौरान हटिया विधायक नवीन जायसवाल भी मौके पर पहुंचे। प्रदर्शन कर रही बच्चियों ने विधायक के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर की और नारेबाजी की। बच्चियों ने कहा कि उन्हें नेताओं का समर्थन या ‘जिंदाबाद’ नहीं चाहिए, बल्कि उनके परिवारों के लिए ठोस समाधान चाहिए।
अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर अब सवाल पुनर्वास व्यवस्था पर उठ रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि यदि उन्हें हटाया जा रहा है तो उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था भी की जानी चाहिए। वहीं, बच्चों की पढ़ाई और परिवारों के भविष्य को लेकर भी सरकार और प्रशासन से जवाब मांगा जा रहा है। अतिक्रमण हटाना शहर की व्यवस्था के लिए जरूरी हो सकता है, लेकिन वर्षों से बसे परिवारों के विस्थापन के बाद उनके पुनर्वास और भविष्य की जिम्मेदारी कौन उठाएगा, यह सवाल अब रांची में चर्चा का विषय बन गया है।

Share This Article