JPSC-JSSC परीक्षाओं में सुधार की मांग तेज, 7 अक्टूबर तक मांगें पूरी नहीं तो छात्र महाजुटान की दी चेतावनी

JPSC और JSSC परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने सरकार को 7 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया। मांगें पूरी नहीं हुईं तो रांची में छात्र महाजुटान होगा।

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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में पारदर्शिता, नियमित बहाली और व्यापक सुधार की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्र प्रतिनिधियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में आंदोलन स्थगित कराने के दौरान वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्व में रिफॉर्म कमेटी गठित करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।

छात्र प्रतिनिधि हर्षित सिंह और अभ्यर्थी निषाद प्रवीण ने बताया कि 22 जुलाई को जेपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद से आयोग में अध्यक्ष और बोर्ड सदस्यों के कई पद खाली पड़े हैं, जिससे भर्ती प्रक्रिया, साक्षात्कार और परीक्षा कैलेंडर पूरी तरह ठप हो गए हैं। छात्रों का कहना है कि पिछले दिनों विभिन्न परीक्षाओं में गड़बड़ी के कारण 22 से अधिक परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं। साथ ही दारोगा भर्ती जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं 2017 के बाद से नहीं आई हैं और 2020 की एलडीसी भर्ती का विज्ञापन वापस ले लिया गया था, जिससे युवाओं का भविष्य अधर में लटका है।

आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए छात्रों ने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और तकनीकी बदलावों की मांग की है। इसमें अमिताभ कौशल समिति का तत्काल गठन करने, JPSC में खाली पदों को भरने और UPSC की तर्ज पर वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की बात कही गई है। परीक्षा पैटर्न को पारदर्शी बनाने के लिए प्रीलिम्स में ई-ऑप्शन व नेगेटिव मार्किंग लागू करने, BPSC की तर्ज पर श्रेणीवार कटऑफ और मार्कशीट सार्वजनिक करने तथा मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए कम से कम 90 दिनों का समय देने का आग्रह किया गया है।

इसके अलावा छात्रों ने मुख्य परीक्षा में ऑब्जेक्टिव प्रश्नों के बजाय शॉर्ट आंसर प्रश्न शामिल करने, झारखंड विशेष विषयों को प्राथमिकता देने, क्षेत्रीय भाषाओं के मूल्यांकन में स्केलिंग पैटर्न लागू करने और उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता बनाए रखने की मांग रखी है। छात्रों ने UPPSC की तर्ज पर प्रीमियम सर्विसेज लागू करने तथा इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन अंतिम चयन से चूके अभ्यर्थियों को अन्य सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने और अदालत में छात्रों के मामलों की प्रभावी पैरवी करने का भी सुझाव दिया है। छात्र प्रतिनिधियों ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि 7 अक्टूबर तक रिफॉर्म कमेटी का गठन नहीं होता और आयोग में अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति नहीं की जाती है, तो राज्यभर के अभ्यर्थी रांची में एकजुट होकर विशाल ‘छात्र महाजुटान’ करेंगे।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।