
रांची : सदर अस्पताल में 24 जुलाई को पीसी पीएनडीटी एक्ट 1994 के प्रभावी क्रियान्वयन और गिरते लिंगानुपात को रोकने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में बेटा-बेटी के भेदभाव को खत्म करना, लिंगानुपात में संतुलन बनाना और जिले के अल्ट्रासाउंड केंद्रों को कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना था। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने अधिनियम के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए इस कानून का सख्ती से पालन अनिवार्य है। उन्होंने सभी चिकित्सकों और अल्ट्रासाउंड संचालकों से पारदर्शी तरीके से काम करने की अपील की।
राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने घटते लिंगानुपात को समाज के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए जन-जागरूकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी अल्ट्रासाउंड केवल पंजीकृत डॉक्टरों द्वारा ही किए जाएं और मरीजों का रिकॉर्ड कम से कम दो वर्षों तक सुरक्षित रखा जाए। वहीं, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुरभि कुमारी ने अधिनियम के अनुपालन को सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने की बात कही।
प्रशिक्षण सत्र में राज्य समन्वयक रफत फरजाना ने केंद्रों के पंजीकरण, नवीनीकरण और कानूनी दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कानून चिकित्सकों के खिलाफ नहीं, बल्कि लिंग चयन जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए है। सरकार अवैध गतिविधियों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 1994 में लागू यह अधिनियम केवल आनुवंशिक बीमारियों और विकारों की पहचान के लिए अल्ट्रासाउंड की अनुमति देता है, लिंग निर्धारण पूरी तरह से गैर-कानूनी है। इस अवसर पर जिला क्षय रोग पदाधिकारी डॉ. एस. बास्की, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, जिला समन्वयक राकेश राय, जिला डाटा प्रबंधक संजय तिवारी सहित जिले भर से आए अल्ट्रासाउंड संचालकों, डॉक्टरों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

