सदर अस्पताल में विश्व रेबीज दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, डॉक्टरों ने कहा- समय पर टीकाकरण ही रेबीज से बचाव की चाबी

रांची के सदर अस्पताल में विश्व रेबीज दिवस पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में डॉक्टरों ने पशु काटने पर तुरंत घाव धोने और समय पर टीकाकरण को जीवनरक्षक बताया।

News Aroma
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रांची: विश्व रेबीज जागरूकता दिवस के अवसर पर सोमवार को सदर अस्पताल रांची में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रेबीज की रोकथाम, प्राथमिक उपचार तथा समय पर टीकाकरण के महत्व पर विस्तृत चर्चा की। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “एक साथ मिलकर मजबूत” रखी गई है, जो स्वास्थ्य, पशुपालन विभाग और आमजन के सामूहिक प्रयासों से रेबीज उन्मूलन पर जोर देती है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. प्रभात कुमार, सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद, राज्य महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कर्ण सहित RIMS और जिला स्वास्थ्य समिति के कई वरिष्ठ चिकित्सक व अधिकारी उपस्थित रहे।

पशु के काटने पर तुरंत क्या करें?

सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने बताया कि रेबीज के लक्षण दिखने के बाद यह बीमारी शत-प्रतिशत जानलेवा हो जाती है, लेकिन सही समय पर प्राथमिक उपचार से इससे पूरी तरह बचा जा सकता है। किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं। किसी भी घरेलू नुस्खे को आजमाने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) का पूरा कोर्स लें।

अस्पतालों में 24×7 वैक्सीन की सुविधा

डॉ. प्रभात कुमार ने जानकारी दी कि जिला अस्पताल में 24 घंटे एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है। अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी यह सुविधा दी जा रही है और जल्द ही इसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने सभी अस्पतालों में ‘वाउंड वॉशिंग एरिया’ की अनिवार्यता पर बल दिया।

2030 तक रेबीज उन्मूलन का लक्ष्य

महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कर्ण ने बताया कि 22 से 28 सितम्बर तक राज्य में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक रेबीज से होने वाली मौतों को शून्य पर लाना है। इसके लिए ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत मानव और पशु स्वास्थ्य विभागों को मिलकर काम करना होगा। विशेषज्ञों ने पालतू जानवरों का समय पर टीकाकरण कराने और स्कूली पाठ्यक्रम में रेबीज जागरूकता को शामिल करने की सलाह दी। RIMS के विशेषज्ञों ने पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस और इम्युनोग्लोबुलिन के महत्व को रेखांकित किया। समापन जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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