रांची के सैम्फोर्ड अस्पताल में हंगामा, डिस्चार्ज को लेकर परिजनों और बाउंसर्स के बीच विवाद

रांची के सैम्फोर्ड अस्पताल में मरीज के डिस्चार्ज को लेकर परिजनों और बाउंसर्स के बीच विवाद बढ़ा। बिलिंग, धक्का-मुक्की और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे।

Razi Ahmad
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Samford Hospital : राजधानी रांची स्थित सैम्फोर्ड अस्पताल में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई जब एक मरीज को डिस्चार्ज नहीं किए जाने को लेकर परिजनों और अस्पताल प्रबंधन के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। इस दौरान अस्पताल के बाउंसर्स और परिजनों के बीच तीखी नोकझोंक तथा धक्का-मुक्की की घटना भी सामने आई है।

मिली जानकारी के अनुसार, सरोज देवी नामक महिला पिछले 10 दिनों से सैम्फोर्ड अस्पताल में भर्ती हैं। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल द्वारा लगभग 12 लाख रुपये का बिल बनाया गया है। उनका कहना है कि वे मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कराना चाहते थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से इसमें सहयोग नहीं किया जा रहा था, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया।

परिजनों का आरोप है कि मरीज को छुट्टी देने की मांग पर अस्पताल के बाउंसर्स उनके साथ उलझ गए। विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कई लोगों के घायल होने की भी सूचना है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग वहां जुट गए।

मामले की जानकारी मिलने पर सामाजिक संगठन संपूर्णा संकटमोचन फाउंडेशन के प्रतिनिधि भी अस्पताल पहुंचे। फाउंडेशन की ओर से अस्पताल से जुड़े इस पूरे प्रकरण पर सवाल उठाए गए और मरीज के परिजनों की शिकायतों को गंभीरता से लेने की मांग की गई। संगठन के सदस्यों ने अस्पताल प्रबंधन से मामले की पारदर्शी जांच कराने और उचित समाधान निकालने की अपील की।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि मरीज की वर्तमान स्थिति क्या है और डिस्चार्ज को लेकर विवाद की वास्तविक वजह क्या थी।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए गए। मामले को लेकर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। यदि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला निजी अस्पतालों में मरीजों के उपचार, बिलिंग प्रक्रिया और डिस्चार्ज नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जानकारी और दोनों पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।