
महुआडांड़ ; महुआडांड़ विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर संत जेवियर महाविद्यालय, महुआडांड़ में आदिवासी संस्कृति, परंपरा, कला और सामुदायिक अस्मिता को समर्पित एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूरा परिसर उत्साह, गर्व और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आया।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और पारंपरिक लोकधुनों के साथ हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच के माध्यम से जीवंत कर दिया।
उरांव और संथाली नृत्य ने बांधा समां
कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण उरांव और संथाली नृत्य रहा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे छात्रों और छात्राओं ने ढोल, मादल और नगाड़े की थाप पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। नृत्य के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति प्रेम, सामुदायिक एकता और उत्सवधर्मिता की सुंदर झलक देखने को मिली। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
अपनी जड़ों से जुड़ाव ही हमारी ताकत है – प्राचार्य
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोस ने कहा: अपनी संस्कृति हमारी पहचान है, अपनी परंपरा हमारा गौरव है और अपनी जड़ों से जुड़ाव हमारी ताकत है। आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति और प्रकृति के साथ उसका गहरा संबंध हमारी अमूल्य विरासत है। युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह अपनी भाषा, परंपरा, कला और सांस्कृतिक मूल्यों को समझे, उनका सम्मान करे और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाए।उपप्राचार्य डॉ. फादर समीर टोप्पो ने आदिवासी समाज की सामुदायिक भावना और प्रकृति के प्रति प्रेम को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों से अपनी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का आह्वान किया।वहीं प्रो. शिल्पी होरो ने कहा कि आज के समय में आदिवासी भाषा, कला और अस्मिता के संरक्षण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
रैम्प वॉक में दिखी जनजातीय विविधता
समारोह के दौरान आयोजित रैम्प वॉक प्रतियोगिता भी सबके आकर्षण का केंद्र रही। विद्यार्थियों ने विभिन्न जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा पहनकर आत्मविश्वास के साथ मंच पर वॉक किया और संस्कृति के सौंदर्य को प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता परिणाम:
प्रथम स्थान – प्रिंस बारा
द्वितीय स्थान – आनंद नगेशिया
तृतीय स्थान – अंजन केरकेट्टा
गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में फा. लियो, फा. राजीप, सिस्टर चन्द्रोदया, प्रो. मनीषा, प्रो. बंसती, प्रो. अंकिता, प्रो. आदिति, प्रो. रेचेल, प्रो. सुष्मिता, प्रो. सुकुट, प्रो. रोनित, प्रो. शशि, प्रो. मन्नू, प्रो. जामेश, प्रो. मोनिका सहित सभी शिक्षक और अनोरा दीदी, सुनीता दीदी, क्रिस्टीना दीदी, प्रेमा, सरोज, नीलम, अशोक, सुचित, जयप्रकाश एवं संतोष सहित शिक्षकेत्तर कर्मचारी मौजूद रहे।समारोह के अंत में यह संदेश दिया गया कि आदिवासी संस्कृति केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान की जीवंत पहचान और भविष्य की प्रेरणा है पूरा कार्यक्रम सांस्कृतिक गौरव, एकता और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की भावना के साथ संपन्न हुआ


