
रांची: रांची में अचानक बदले मौसम, रिमझिम बारिश, उमस और तापमान में आ रहे उतार-चढ़ाव ने लोगों की सेहत बिगाड़ दी है। राजधानी के सरकारी और निजी अस्पतालों में मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। लोग वायरल फीवर, खांसी, जुकाम, गले में खराश के साथ-साथ उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दिन और रात के तापमान में आ रहे अचानक बदलाव से वायरस के फैलने के लिए अनुकूल माहौल बन रहा है, जिससे हर उम्र के लोग इसकी चपेट में है।
अस्पतालों में मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया है। सदर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 20 मरीज बुखार, उल्टी और डिहाइड्रेशन की शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि इस समय अस्पताल आने वाले लगभग आधे मरीज मौसमी वायरल और पेट के संक्रमण से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिससे लोग जल्दी बीमार होते हैं।
वहीं रिम्स में भी स्थिति चिंताजनक है, जहां हफ्ते भर पहले रोजाना आने वाले 2 से 3 मरीजों की तुलना में अब प्रतिदिन 10 से 15 नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं। बदलते मौसम का सबसे बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में उतार-चढ़ाव और एलर्जी के कारण बच्चे आसानी से संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। डॉ. अनिताभ कुमार के अनुसार ऊपरी श्वसन तंत्र में संक्रमण (अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) और वायरल बुखार के मरीजों में काफी उछाल आया है। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे साफ और उबला हुआ पानी पीएं, ताजा भोजन करें और बाहर के खुले या बासी खाने से परहेज करें। साथ ही, बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवाइयां न लेने की हिदायत दी गई है। यदि बुखार तीन से पांच दिनों से ज्यादा रहे, सांस लेने में तकलीफ हो या बार-बार उल्टी व डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से परामर्श लें।

