
Ranchi Slaughter House : राजधानी में हाइजीनिक मीट की उपलब्धता शहरवासियों के लिए सपना बनकर रह गई है। नगर निगम की उदासीनता और नियमावली न बनने के कारण कांके स्थित 18 करोड़ की लागत से बना अत्याधुनिक स्लॉटर हाउस पिछले छह वर्षों से बंद पड़ा है। हालात ये है कि जर्मनी से मंगवाई गई करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनें जंग खा रही हैं, जबकि शहर में रोजाना लगभग 2,400 जानवरों को खुले में काटा जा रहा है।
नगर विकास विभाग और रांची नगर निगम के बीच जारी खींचतान और नियमावली न होने के कारण खुले में मीट बेचने वाले दुकानदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। शहर में 800 से अधिक बिना लाइसेंस वाली मीट दुकानें चल रही हैं। खुले में कटने वाले मांस पर धूल, मक्खियों और बैक्टीरिया का खतरा रहता है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है।
झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य विभाग को दो महीने के भीतर नियमावली बनाकर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होनी है। स्लॉटर हाउस की क्षमता प्रतिदिन 2,000 बकरे/खस्सी काटने की है। आम लोग भी मात्र 100 देकर झटका या हलाल विधि से पशु कटवा सकते हैं। शहर की दुकानों तक हाइजीनिक मीट पहुंचाने के लिए दो डीप फ्रीजर वैन भी उपलब्ध कराई गई थीं।
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि विषय जनहित से जुड़ा है। नियमावली के प्रारूप पर विचार-विमर्श जारी है, जिसे तैयार होते ही जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। वहीं मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि स्लॉटर हाउस एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। इसके संचालन में आ रही बाधाओं को दूर कर इसे नए सिरे से शुरू कराया जाएगा।

