पथनमथिट्ठा (केरलम): वार्षिक मंडलम-मकरविलक्कू तीर्थयात्रा सत्र की शुरुआत से कुछ हफ्ते पहले रविवार को अरीक्कारा सुब्रमण्यम शंकरन नंबूदरी को शबरिमला भगवान अयप्पा मंदिर के नए ‘मेलशांति’ (मुख्य पुजारी) के रूप में चुना गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। शबरिमला मंदिर से करीब 100 मीटर दूर स्थित मलिकप्पुरम देवी मंदिर के नए मुख्य पुजारी के रूप में ए. दामोदरन नंबूदरी को चुना गया है।

अधिकारियों के अनुसार, सुबह की पूजा के बाद पर्ची निकालकर चयन किया गया। शबरिमला मंदिर के मुख्य पुजारी पद के लिए सात नामों पर विचार किया गया था। तिरुवनंतपुरम निवासी शंकरन नंबूदरी वर्तमान में राज्य की राजधानी स्थित पझावंगडी गणपति मंदिर के मुख्य पुजारी हैं।
कोझिकोड जिले के वडकरा के रहने वाले दामोदरन नंबूदरी वर्तमान में पय्योली के कीझूर स्थित भगवान शिव मंदिर के मुख्य पुजारी हैं। दोनों 16 नवंबर को एक साल के लिए कार्यभार संभालेंगे। इसके एक दिन बाद मंडलम-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा सत्र के लिए शबरिमला मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।
शंकरन नंबूदरी ने पत्रकारों से बातचीत में अपने चयन पर खुशी जताई और कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इस बार उनका चयन होगा। उन्होंने कहा कि पिछले साक्षात्कारों में सूची में उनका नाम अंत में आता था लेकिन इस बार उनका नाम सबसे पहले आया। उन्होंने अपने चयन का श्रेय पझावंगडी गणपति मंदिर के भगवान गणपति को दिया जहां वह पिछले पांच वर्ष से ‘मेलशांति’ के रूप में सेवा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने 2020 से पहले शबरिमला के लिए आवेदन किया था। मैं 2020 से इस पझावंगडी गणपति मंदिर का मुख्य पुजारी हूं। इसके बाद मैंने आवेदन नहीं किया क्योंकि यह भारतीय सेना के प्रबंधन वाला मंदिर है और इसकी अपनी प्रक्रियाएं हैं। इसके लिए हमें अनुमति लेनी होती है। इस बार मुझे अनुमति मिली।’’
उन्होंने पूजा-पद्धतियां सिखाने का श्रेय अपने गुरुओं और पूर्वजों को भी दिया। उन्होंने कहा कि इस साल चयन प्रक्रिया के लिए कड़े नियमों के कारण प्रतिस्पर्धा काफी मुश्किल हो गई थी लेकिन उन्हें इसकी चिंता नहीं थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं लगातार 21 वर्षों से मेलशांति रहा हूं। इसलिए मेरे लिए यह कोई बड़ी समस्या नहीं थी। मुझे इस बार काफी उम्मीद थी। भगवान की कृपा है, इसके अलावा मैं और क्या कह सकता हूं।’’
शंकरन नंबूदरी ने पलावंगडी गणपति मंदिर में मौजूदा जिम्मेदारी संभालने से पहले नेदुमंगड भगवती मंदिर, कोट्टायम मंदिर, दिल्ली के आरके पुरम स्थित अयप्पा मंदिर और तिरुवनंतपुरम के थायकाड शास्ता मंदिर में मेलशांति के रूप में सेवा दी है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जिन भी देवी-देवताओं की पूजा की है, उनका आशीर्वाद निश्चित रूप से मेरे साथ रहेगा। यह मेरे लिए बड़ी ताकत होगी। मैं बहुत खुश हूं। एक साल तक भगवान की सेवा करने का अवसर मिलना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है।’’
उन्होंने कहा कि कार्यभार संभालने से पहले भगवान अयप्पा का आशीर्वाद लेने के लिए वह संभवत: सोमवार को शबरिमला मंदिर जाएंगे। उन्होंने दुनियाभर के अयप्पा श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए एक साल के अपने कार्यकाल के दौरान पूरी निष्ठा से भगवान की सेवा करने का भरोसा दिलाया।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी ओर से कभी कोई दुर्व्यवहार नहीं होगा और न ही धन कमाने की कोई इच्छा होगी। भगवान ने मुझे जीवनयापन के लिए पर्याप्त दिया है। मैं इसे भगवान की सेवा करने का बहुत बड़ा अवसर मानता हूं। मैं किसी दूसरी बात के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहा हूं।’’
त्रिशूर के प्रसाद ई डी शबरिमला मंदिर के निवर्तमान मेलशांति हैं जबकि कोल्लम के मनु नंबूदरी एम जी मलिकप्पुरम मंदिर के निवर्तमान मेलशांति हैं।
चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के अध्यक्ष के जयकुमार ने चयनित मेलशांति से संपर्क किया। जयकुमार ने संवाददाताओं से कहा कि वह चयन प्रक्रिया के सुचारू रूप से संपन्न होने से खुश हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ऑनलाइन कतार के जरिये पहले ही 50,000 से अधिक बुकिंग हो चुकी हैं। दो दिनों के लिए भी बुकिंग उपलब्ध है। 18 और 19 तारीख के लिए 50,000 से अधिक लोगों ने बुकिंग कराई है।’’


