डायन-बिसाही के आरोप में महिला की हत्या, अदालत ने सुनाई उम्रकैद; 26 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

सिमडेगा में डायन-बिसाही के आरोप में महिला की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी को उम्रकैद और 26 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाकर कड़ा संदेश दिया।

Razi Ahmad
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Simdega News: झारखंड के सिमडेगा जिले में अंधविश्वास के चलते एक महिला की हत्या करने के मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी विश्राम बिंझिया उर्फ चिल्ली को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने उस पर 26 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

यह मामला पाकरटांड़ थाना क्षेत्र के रेंगारपानी गांव से जुड़ा है, जहां वर्ष 2022 में एक महिला की डायन-बिसाही के आरोप में हत्या कर दी गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और पुलिस अनुसंधान के आधार पर आरोपी को दोषी पाया।

जानकारी के अनुसार, 30 जुलाई 2022 को पाकरटांड़ थाना में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के अलावा डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि विश्राम बिंझिया ने अंधविश्वास के कारण महिला नंदा देवी को डायन बताते हुए उन पर जानलेवा हमला किया था।

मृतका की पुत्री किरण कुमारी ने पुलिस में दर्ज शिकायत में बताया था कि आरोपी ने उसकी मां के साथ मारपीट की और धारदार हथियार से सिर तथा चेहरे पर कई वार किए। गंभीर चोटों के कारण नंदा देवी की मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी के खिलाफ साक्ष्य जुटाए।

मामले की जांच वैज्ञानिक तरीके से की गई और अभियोजन पक्ष ने अदालत में प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान सभी महत्वपूर्ण गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिससे मामले की कड़ियां मजबूत हुईं। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक श्रीमती निशी कच्छप ने पैरवी की, जबकि मामले के अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक हेमकिशोर गुप्ता थे।

करीब चार वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इस फैसले को अंधविश्वास और डायन प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

सिमडेगा पुलिस ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे वैज्ञानिक जांच और मजबूत अभियोजन का परिणाम बताया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में ठोस साक्ष्य और समय पर गवाहों की उपस्थिति न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाती है। यह फैसला समाज में फैली अंधविश्वास आधारित हिंसा के खिलाफ कानून की सख्ती को भी दर्शाता है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।