एसआरएफटीआई के विद्यार्थियों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी, कुलपति के इस्तीफे की मांग

कोलकाता के एसआरएफटीआई में छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी रहा। विद्यार्थियों ने कुलपति के इस्तीफे, अनुशासनात्मक नोटिस वापसी और परिसर हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग की।

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कोलकाता: सत्यजीत राय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआई) के विद्यार्थियों ने परिसर में हिंसा के विरोध में जारी अनिश्चितकालीन धरने के चौथे दिन बृहस्पतिवार को संस्थान के चेयरमैन सुरेश गोयल को पत्र लिखकर मौजूदा संकट में तत्काल हस्तक्षेप करने और कुलपति के इस्तीफे की मांग की। एसआरएफटीआई छात्र संघ ने 14 अक्टूबर को लिखे एक पत्र में कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की जाती तब तक उसके सदस्य ‘‘शैक्षणिक गतिविधियां ठप रखने के साथ ही अनिश्चितकालीन धरना’’ जारी रखेंगे।

इसमें कहा गया है कि इन मांगों में कुलपति संतोष अजमेरा का इस्तीफा, अनुशासनात्मक नोटिस वापस लेना और परिसर में हुई हिंसा की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से जांच कराना शामिल है। प्रतिष्ठित फिल्म संस्थान में 28 सितंबर से कक्षाएं स्थगित हैं। छात्र संघ की अध्यक्ष ब्लॉसम हजारिका और उपाध्यक्ष शुभम वायदांडे के हस्ताक्षर वाले पत्र में संस्थान के अधिकारियों और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया है। एसआरएफटीआई के एक अधिकारी ने बताया कि अनुशासनात्मक आधार पर और परिसर की दीवारों पर ‘‘आपत्तिजनक नारे लिखने’’ के आरोप में आठ विद्यार्थियों को प्रशासन ने कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

उन पर अनुशासन का उल्लंघन करने वाले कुछ पोस्टर लगाने, कुलपति के कक्षाएं फिर से शुरू करने के अनुरोध पर ध्यान नहीं देने और पिछले सप्ताह कुलपति के कमरे में सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया है। एसआरएफटीआई प्रशासन के दावे का खंडन करते हुए विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि 27 सितंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े समूह ‘अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत’ (एबीजीपी) के सदस्यों ने उन पर हमला किया था। ‘बंगीय हिंदू जागरण मंच’ के सदस्यों द्वारा चार अक्टूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान परिसर में एक बार फिर झड़प हुई थी। उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं में कई छात्र घायल हो गए थे।

विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि संस्थान प्रशासन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और कथित हमलों के बाद पर्याप्त कार्रवाई करने में विफल रहा। उन्होंने दावा किया कि ‘‘जवाबदेही तय करने और संस्थान के अध्यक्ष, कुलपति तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ बातचीत करने के लिए बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिले’’। छात्र संघ ने पत्र में कहा, ‘‘हम अपनी कक्षाओं में लौटना चाहते हैं, शूटिंग और कार्यशालाएं फिर से शुरू करना चाहते हैं और अपना फिल्म निर्माण का काम शुरू करना चाहते हैं।’’

छात्र संघ की प्रमुख मांगों में 28 सितंबर से अब तक नहीं हो पाई सभी कक्षाओं का बिना किसी शर्त के पुनर्निर्धारण करना और प्रदर्शनों के दौरान छात्रों को जारी किए गए अनुशासनात्मक नोटिस तथा कारण बताओ नोटिस वापस लेना भी शामिल है। विद्यार्थियों ने 27 सितंबर और चार अक्टूबर की घटनाओं की जांच के लिए स्वतंत्र जांच समितियों के गठन की भी मांग की। उन्होंने छह और सात अक्टूबर को संस्थान के कर्मचारियों द्वारा डराने-धमकाने, उत्पीड़न और हाथापाई किए जाने के आरोपों की जांच की भी मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि धरने के दौरान कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कुलपति के कार्यालय से जबरन हटाने की कोशिश की थी। विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन संकट से निपटने के उसके तरीके पर सवाल उठाने वाले विद्यार्थियों को डराने के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रहा है।

एसआरएफटीआई के अधिकारी ने विद्यार्थियों के साथ संस्थान के कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों द्वारा मारपीट किए जाने के आरोप से इनकार किया। एसएफटीआई छात्र संघ के प्रवक्ता सुदीप चक्रवर्ती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हमारी शैक्षणिक गतिविधियों का बहिष्कार और धरना एक साथ जारी रहेगा। कारण बताओ नोटिस के संबंध में कानूनी कदम उठाने के लिए हम वकीलों से सलाह-मशविरा कर रहे हैं।’’ विद्यार्थियों ने दावा किया कि नये छात्रावास के निर्माण का प्रस्ताव तीन साल से लंबित है। प्रतिक्रिया के लिए कुलपति से संपर्क नहीं हो सका।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।