
शूटिंग की शुरुआत नवंबर से धनबाद में होगी
धनबाद : मजदूरों के मसीहा कहे जानेवाले झरिया के पूर्व विधायक रहे सूर्यदेव सिंह के जीवन पर एक वेब सीरिज का निर्माण किया जायेगा। इसे लेकर सूर्यदेव सिंह के परिवार के सदस्यों के साथ वेब सीरीज की पूरी कोर टीम की मीटिंग हुई। इस बैठक में जाने-माने डायरेक्टर्स अभिषेक चौबे और मोहित झा, डीओपी (DOP) तरुण अचपाल, प्रोडक्शन डिज़ाइनर रीता घोष, एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर ऑली और लाइन प्रोड्यूसर संजीव वर्मा के साथ टीम के अन्य प्रमुख सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सभी के साथ मिलकर वेब सीरीज के पूरे विज़न, शूटिंग की सटीक टाइमिंग, बेहतरीन लोकेशंस और धनबाद में होने वाले ऑडिशंस को लेकर विस्तृत और सकारात्मक चर्चा हुई। वेब सीरिज की तैयारियां पूरे ज़ोर-शोर पर हैं और यह तय किया गया है कि धनबाद में ऑडिशंस: सितंबर के आसपास आयोजित किए जाएंगे। शूटिंग की शुरुआत नवंबर से धनबाद में होगी। सूर्यदेव सिंह के परिवार की मिनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि ससुर जी की कहानी को इतने दिग्गजों के साथ पर्दे पर जीवंत होते देखना हमारे पूरे परिवार के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। इस बड़े और खूबसूरत सफ़र के लिए पूरी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं।
कौन थे सूर्यदेव सिंह
चार दशक से झरिया की राजनीति में सिंह मेंशन के लोग छाए हैं, यह सूर्यदेव सिंह की ही देन है। पहले सूर्यदेव फिर इनकी पत्नी कुंती देवी, और उनके बाद पुत्र संजीव सिंह झरिया के विधायक बने। सूर्यदेव ने 70 के दशक में जनता मजदूर संघ का गठन कर कोयला मजदूरों को उनका हक दिलाया, इसलिए मजदूर इन्हें मसीहा के रूप में भी लोग याद करते हैं। 1977 से सूर्यदेव लगातार चार बार झरिया विधानसभा से विधायक बने।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिला स्थित गोन्हिया छपरा में एक किसान परिवार के घर में जन्मे सूर्यदेव सिंह लगभग 22 वर्ष की उम्र में काम की तलाश में झरिया आए थे। शैक्षणिक योग्यता अधिक नहीं होने के कारण कोलियरी में कई वर्षों तक काम किया। बाद में मजदूर नेता बीपी सिन्हा के यहां भी रहे। वर्षों तक विभिन्न मजदूर संगठनों में भी रहे। सूर्यदेव ने जनता पार्टी का उम्मीदवार बनकर यहां के श्रमिक नेता एसके राय को हराकर पहली बार 1977 में झरिया के विधायक बने। इसके बाद उन्होंने 1980, 1985 व 1990 में भी जीत दर्ज की। झरिया से लगातार चार बार चुनाव जीतने का रिकार्ड सूर्यदेव सिंह के ही नाम है। वर्ष 1991 में बलिया में सांसद का चुनाव लड़ने के दौरान 15 जून को उनका निधन हो गया।

