
Mahuadand News : महुआडांड़ प्रखंड की अक्सी से ओरसा पंचायत के गांवों को जोड़ने वाली गांव आज भी विकास की आस पत्थरों तले दबी है। तंबोली से जामडीह होते हुए ओरसा पंचायत को जोड़ने वाली करीब 10 किलोमीटर की सड़क पिछले कई वर्षों से बदहाली का शिकार है।
सड़क के नाम पर यहां सिर्फ बड़े-बड़े नुकीले पत्थर और गहरे गड्ढे हैं। बरसात में कीचड़ और दलदल, गर्मी में धूल का गुबार। इसी “मौत के रास्ते” से गुजरते हुए अब तक दर्जनों बुजुर्ग, महिलाएं और स्कूली बच्चे चोटिल हो चुके हैं। कई बार बाइक-साइकिल पलटने से गंभीर हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद नहीं टूटी।
“मरीज को डोली में ले जाना पड़ता है 10 KM”
स्थानीय ग्रामीणों का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि यहां से बीमार को अस्पताल पहुंचाना मतलब मौत को बुलावा देना है। गर्भवती महिलाओं को डोली में लादकर 10 किलोमीटर तक ले जाना पड़ता है। बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं। हमने कई बार आवेदन दिया, लेकिन सरकार की योजनाएं फाइलों में ही धूल फांक रही हैं।
वन विभाग: “फंड मिलते ही मरम्मत कराएंगे”
सड़क का एक बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। वन नियमों के अनुसार वन क्षेत्र के संपर्क मार्गों और गश्ती पथों के रख-रखाव के लिए वन विभाग को हर साल मेंटेनेंस फंड मिलता है।
इस संबंध में प्रभारी वनपाल ओम प्रकाश पाल ने कहा कि सड़क वन क्षेत्र से गुजरती है। जैसे ही विभाग से मेंटेनेंस का फंड मिलेगा, तत्काल सड़क की मरम्मत करा दी जाएगी।
मुखिया अमृता देवी: “5 गांवों की जिंदगी दांव पर”
ओरसा पंचायत की मुखिया अमृता देवी ने व्यथा सुनाई। उन्होंने कहा: मैं इस मिट्टी की बेटी हूं। रोज देखती हूं कैसे हमारी दादी-नानी पत्थरों पर गिरकर लहूलुहान होती हैं। तंबोली, जामडीह, ओरसा समेत 5 गांवों की जिंदगी इसी एक सड़क पर टिकी है। हमने कई प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने DC-DFO से लगाई गुहार
ग्रामीणों ने लातेहार DC संदीप कुमार और वन प्रमंडल पदाधिकारी DFO से मांग की है कि इस सड़क का तत्काल सर्वे कराकर या तो स्थायी निर्माण कराया जाए या फिर तत्काल मरम्मत कर आवागमन लायक बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन को मजबूर होंगे।

