टाटा संस की सूचीबद्धता के समर्थन में उतरा शापूरजी पालोनजी समूह

टाटा संस की सूचीबद्धता को शापूरजी पालोनजी समूह का समर्थन मिला, जबकि टाटा ट्रस्ट विरोध में है; आरबीआई के फैसले के बाद कंपनी पर नियामकीय दबाव बढ़ा है।

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नई दिल्ली : टाटा संस में दूसरे सबसे बड़े शेयरधारक शापूरजी पालोनजी समूह ने कंपनी की शेयर बाजार में सूचीबद्धता का शुक्रवार को समर्थन किया। समूह के चेयरमैन शापूर मिस्त्री ने कहा कि सूचीबद्धता से टाटा संस में पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही मजबूत होगी।शापूरजी पालोनजी (एसपी) समूह के पास टाटा संस में करीब 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं, टाटा ट्रस्ट के पास सामूहिक रूप से करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ट्रस्ट कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहा है।

मिस्त्री ने एक बयान में कहा कि सूचीबद्धता ‘सिर्फ वित्तीय या नियामकीय मामला नहीं’, बल्कि ‘सामाजिक और नैतिक जरूरत’ भी है। उन्होंने इसे ट्रस्ट की परोपकारी भूमिका को बनाए रखते हुए कंपनी के संचालन को मजबूत करने का अवसर बताया। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब टाटा संस के निदेशक मंडल और कंपनी को नियंत्रित करने वाले टाटा ट्रस्ट के बीच सूचीबद्धता के मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 11 सितंबर को टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में अपना पंजीकरण स्वेच्छा से समाप्त करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। साथ ही उसने कंपनी को ‘अपर लेवल’ की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) पर लागू नियामकीय ढांचे का पालन करने के लिए कदम उठाने को भी कहा था।

टाटा संस ने मार्च, 2024 में 21,813 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने के बाद अपना पंजीकरण समाप्त करने का अनुरोध किया था। कंपनी को 2022 में ‘अपर लेवल’ की एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इस श्रेणी की कंपनियों पर शेयर बाजार में सूचीबद्धता समेत अतिरिक्त नियामकीय शर्तें लागू होती हैं। टाटा संस ने सितंबर, 2025 की मूल समयसीमा तक खुद को बाजार में सूचीबद्ध नहीं किया और इसके बजाय पंजीकरण समाप्त कराने की प्रक्रिया अपनाई थी। मिस्त्री ने कहा कि आरबीआई के फैसले से ‘पूरी स्पष्टता’ मिल गई है और अब टाटा संस को ‘अपर लेवल’ की एनबीएफसी पर लागू नियामकीय ढांचे का पालन करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सूचीबद्धता से निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है और कंपनी के मूल्य की जानकारी बेहतर तरीके से सामने आ सकती है। इससे परोपकारी कार्यों के लिए धन जुटाने का आधार भी मजबूत हो सकता है। मिस्त्री ने शेयरधारकों, टाटा ट्रस्ट और अन्य हितधारकों के बीच मतभेद दूर करने की अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे को विभाजन का कारण नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘टाटा संस की सूचीबद्धता एक सेतु का काम कर सकती है।’’ टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने कंपनी से सूचीबद्धता के बजाय अन्य विकल्प तलाशने को कहा है। ट्रस्ट ने सूचीबद्धता के विकल्प के तौर पर कम से कम 25,000 करोड़ रुपये के लेनदेन के जरिये एसपी समूह को नकदी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है।

उन्होंने कहा कि शापूरजी पालोनजी समूह टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर अधिक मजबूत और सौहार्दपूर्ण संबंध बनाने की दिशा में काम करने को तैयार है।यह घटनाक्रम टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर भी मतभेद के बीच आया है। टाटा संस के निदेशक मंडल ने उनके कार्यकाल में विस्तार का समर्थन किया है, जबकि नोएल टाटा ने इसका विरोध किया है और ट्रस्ट ने फैसले की वैधता को चुनौती दी है। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस का कारोबार प्रौद्योगिकी, वाहन, इस्पात, विमानन तथा उपभोक्ता उत्पाद समेत विभिन्न क्षेत्रों में फैला है। कंपनी अब तक निजी स्वामित्व में रही है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।