जमशेदपुर: टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में कैंटीन की नई व्यवस्था लागू होते ही पहले दिन अव्यवस्था सामने आ गई। गुरुवार, 15 अक्टूबर को कई कैंटीनों और ट्रॉली प्वाइंट पर सुबह 10:30 बजे तक नाश्ता नहीं पहुंचा, जिससे कर्मचारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। समय पर नाश्ता नहीं मिलने से नाराज कुछ कर्मचारी गेट पास लेकर प्लांट से बाहर चले गए। वहीं, टाटा वर्कर्स यूनियन के कई कमेटी मेंबरों ने भी नई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

15 बड़े कैंटीन और 104 ट्रॉली प्वाइंट की व्यवस्था
टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में कर्मचारियों के लिए 15 बड़े कैंटीन और 104 ट्रॉली प्वाइंट संचालित हैं। पहले करीब 80 प्रतिशत कैंटीनों की जिम्मेदारी शौर्य इन के पास थी, जबकि शेष 20 प्रतिशत कैंटीनों का संचालन सीएसएस एजेंसी करती थी। अब प्रबंधन ने दोनों एजेंसियों के बीच जिम्मेदारी का बंटवारा 50-50 प्रतिशत कर दिया है। यह नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू की गई है। हालांकि, व्यवस्था बदलने के पहले ही दिन नाश्ते की आपूर्ति प्रभावित होने से कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई।
एमडी ऑनलाइन में भी उठा था भोजन की गुणवत्ता का मुद्दा
कैंटीन व्यवस्था को लेकर इससे पहले एक अक्टूबर को आयोजित टाटा स्टील के मासिक कार्यक्रम ‘एमडी ऑनलाइन’ में भी शिकायत की गई थी। एक कर्मचारी ने कंपनी के सीईओ सह प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन के सामने कैंटीन में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। कर्मचारी का कहना था कि कई जगह खाना ठंडा मिलता है, जबकि कुछ कैंटीनों में भोजन की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं रहती। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए टीवी नरेंद्रन ने संबंधित अधिकारियों को कैंटीन व्यवस्था में तत्काल सुधार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रबंधन के अधिकारी सक्रिय हुए और प्रोक्योरमेंट विभाग ने दोनों एजेंसियों के बीच जिम्मेदारियों का नया बंटवारा करने का निर्णय लिया। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के पहले ही दिन नाश्ता समय पर नहीं पहुंचने से प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं।
एलडी-3, एलडी-2 और स्लैब कास्टर में भी परेशानी
मिली जानकारी के अनुसार, एलडी-3, एलडी-2, स्लैब कास्टर समेत कई कैंटीनों और ट्रॉली प्वाइंट पर नाश्ते की आपूर्ति समय पर नहीं हो सकी। इससे कर्मचारियों को काम के दौरान परेशानी हुई। नाश्ता नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों के बीच नाराजगी देखी गई और कुछ कर्मचारी गेट पास लेकर प्लांट से बाहर चले गए। अब कर्मचारियों को दोपहर के भोजन की व्यवस्था को लेकर भी चिंता सताने लगी है। प्लांट में उत्पादन कार्य के दौरान लंच का समय निर्धारित रहता है। ऐसे में कर्मचारियों के लिए तय समय पर भोजन उपलब्ध होना जरूरी है। सुबह नाश्ते की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद कर्मचारियों को आशंका है कि कहीं दोपहर के भोजन में भी देरी न हो जाए।
यूनियन के कमेटी मेंबरों ने भी उठाए सवाल
कैंटीन व्यवस्था में हुई गड़बड़ी को लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबरों के व्हाट्सऐप ग्रुप में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कमेटी मेंबरों और कर्मचारियों के बीच नई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कर्मचारियों की मांग है कि कैंटीनों और ट्रॉली प्वाइंट तक नाश्ता तथा भोजन समय पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अब देखना होगा कि प्रबंधन और संबंधित एजेंसियां इस अव्यवस्था को दूर करने के लिए कितनी जल्दी कदम उठाती हैं। नई व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य कैंटीन संचालन में सुधार करना है, लेकिन पहले ही दिन आपूर्ति प्रभावित होने से कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में प्रबंधन के सामने समय पर नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था को सुचारु बनाना बड़ी चुनौती है।


