तिरुवनंतपुरम: श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की पारंपरिक ‘अराट्टू’ शोभायात्रा को रनवे से होकर गुजरने की अनुमति दिए जाने के कारण तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 20 अक्टूबर को पांच घंटे के लिए उड़ान सेवाएं निलंबित रहेंगी। हवाई अड्डे का संचालन करने वाली कंपनी टीआईएएल ने रविवार को यह जानकारी दी।
यह रस्म त्रावणकोर के राजपरिवार से जुड़ी दशकों पुरानी परंपरा के अनुसार निभाई जाती है।
तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (टीआईएएल) ने एक बयान में कहा कि श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की ‘अल्पासी अराट्टू’ शोभायात्रा के मद्देनजर 20 अक्टूबर को शाम चार बजे से रात नौ बजे तक उड़ान सेवाएं निलंबित रहेंगी।
कंपनी ने कहा कि उड़ानों के संशोधित समय की जानकारी संबंधित विमानन कंपनियों के पास उपलब्ध है।
हवाई अड्डे पर दशकों से हर साल दो बार उड़ानों का संचालन कुछ समय के लिए रोक दिया जाता है और उनके समय में बदलाव किया जाता है, ताकि मंदिर की सदियों पुरानी पारंपरिक शोभायात्रा रनवे से होकर गुजर सके।
मंदिर की शोभायात्रा के शंगुमुगम समुद्र तट तक पहुंचने और वहां मूर्तियों को पवित्र स्नान कराने की यह परंपरा सदियों पहले शुरू हुई थी। वर्ष 1932 में हवाई अड्डे की स्थापना के बाद भी यह परंपरा जारी रही।
इतिहासकारों के अनुसार, जब इस स्थान पर हवाई अड्डे का निर्माण किया गया था, तब तत्कालीन त्रावणकोर के राजा श्री चितिरा तिरुनाल ने स्पष्ट किया था कि यह हवाई अड्डा साल में 363 दिन आम जनता के लिए खुला रहेगा, जबकि दो दिन भगवान पद्मनाभ के लिए आरक्षित रहेंगे। भगवान पद्मनाभ त्रावणकोर के राजपरिवार के कुलदेवता हैं।
अदाणी समूह द्वारा हवाई अड्डे का प्रबंधन संभालने के बाद भी राजशाही के दौर से चली आ रही यह परंपरा जारी है।



