उर्दू सहायक आचार्यों के 7232 पदों पर बहाली दो वर्षों से लंबित, जानें क्या हो रहा नुकसान

झारखंड में उर्दू सहायक आचार्यों के 7232 पदों पर नियुक्ति दो वर्षों से लंबित है। शिक्षकों की भारी कमी से उर्दू विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित, अभ्यर्थियों में निराशा बढ़ी।

News Aroma
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रांची: झारखंड के उर्दू विद्यालयों में उर्दू सहायक आचार्यों के 7232 पदों पर बहाली पिछले दो वर्षों से लंबित पड़ी हुई है, जिससे स्कूलों में पठन-पाठन की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। राज्य के प्राथमिक और मध्य उर्दू विद्यालयों में वर्ष 2015 के बाद से शिक्षकों की कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकी है। वर्ष 2015 में 4401 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे, लेकिन महज 689 शिक्षकों की ही नियुक्ति हो सकी और 3712 पद रिक्त रह गए। इसके बाद सरकार ने इन रिक्त पदों को समाप्त कर वर्ष 2024 में उर्दू सहायक आचार्य के कुल 7232 नए पद सृजित किए थे, जिनमें कक्षा 1 से 5 के लिए 5478 पद और कक्षा 6 से 8 के लिए 1754 पद शामिल हैं। हालांकि, पद सृजन के दो साल बीत जाने के बाद भी अब तक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी है।
सूचना अधिकार कार्यकर्ता अमजद खान द्वारा डीएसई कार्यालय से मांगी गई आरटीआई जानकारी से यह खुलासा हुआ है कि रांची जिले के कई उर्दू विद्यालयों में पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। कुछ विद्यालयों में तो एकीकृत बिहार के समय से ही पद रिक्त चले आ रहे हैं। जिले के मांडर प्रखंड में स्वीकृत 43 पदों में से 34 पद खाली हैं और केवल 9 शिक्षक कार्यरत हैं। उर्दू स्कूल बुढ़मू में 415 विद्यार्थियों पर केवल एक शिक्षक है, जबकि वहां 9 स्वीकृत पदों में से 8 रिक्त हैं और कुछ पद 1966 से खाली हैं। इसी तरह राजकीयकृत मध्य विद्यालय नगड़ी में 197 विद्यार्थी होने के बावजूद स्वीकृत दोनों पद खाली हैं और विद्यालय में एक भी शिक्षक नहीं है।
ओरमांझी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय कुटे में स्वीकृत 5 में से 4 पद और प्राथमिक विद्यालय इरबा में स्वीकृत इकलौता पद खाली पड़ा हुआ है। इसके अलावा रांची में 56 स्वीकृत पदों में से 34 पद रिक्त हैं, जबकि जीएमएस हिंदपीढ़ी उर्दू स्कूल में 425 विद्यार्थियों के बीच 7 स्वीकृत पदों पर महज 3 शिक्षक कार्यरत हैं। कांटाटोली उर्दू स्कूल में भी स्वीकृत दोनों पद पूरी तरह खाली हैं। शिक्षकों की इस भारी कमी के कारण उर्दू विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ रहा है और लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में भारी निराशा है।

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