कोडरमा : राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) के तहत ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह’ पर कोडरमा स्थित कौंडिन्य पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को छात्र-छात्राओं के लिए विशेष मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, मानसिक रोगों की पहचान करना और समय पर विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के डॉ. सिद्धान्त ओहदार ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही व्यक्ति के समग्र विकास का अहम हिस्सा है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने पर सोचने-समझने की क्षमता, भावनात्मक संतुलन और सामाजिक रिश्ते बेहतर रहते हैं। डॉक्टर ने विद्यार्थियों को अवसाद, अत्यधिक चिंता, लगातार उदासी, काम में मन न लगना, नींद और भूख के पैटर्न में बदलाव, एकाग्रता की कमी तथा एकांतवास जैसे लक्षणों के प्रति सतर्क किया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें और पढ़ाई या दैनिक दिनचर्या को प्रभावित करने लगें, तो बिना किसी झिझक के विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से परीक्षा के दबाव, पढ़ाई के तनाव, असफलता के डर, साथियों से प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक अपेक्षाओं और मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल से पैदा होने वाले मानसिक तनाव पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को तनाव मुक्त रहने के उपाय बताते हुए उन्होंने नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, योग-ध्यान, खेलकूद और परिजनों के साथ सकारात्मक संवाद पर जोर दिया।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि मानसिक समस्या कोई कमजोरी या चरित्र दोष नहीं है। उचित परामर्श और उपचार से इसमें पूरी तरह सुधार संभव है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे अपनी भावनाएँ अभिभावकों या शिक्षकों से साझा करें। सहपाठियों का मजाक उड़ाने के बजाय उनकी समस्याओं को समझें और स्कूल में एक तनावमुक्त माहौल बनाने में योगदान दें। इस मौके पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे।


