हर साल दुनिया में 100 बिलियन जानवरों का मांस खा जाते हैं लोग, शाकाहारी लोगों की…

मांसाहारी (Non-Vegetarian) लोगों के विषय में एक चौंकाने वाली Report सामने आई है। दुनियाभर में शायद ही ऐसा कोई देश होगा जहां के लोग मांस नहीं खाते। हर देश के लोग मांस (Meat ) का सेवन करते हैं।

News Aroma
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Meat Eaters: मांसाहारी (Non-Vegetarian) लोगों के विषय में एक चौंकाने वाली Report सामने आई है। दुनियाभर में शायद ही ऐसा कोई देश होगा जहां के लोग मांस नहीं खाते। हर देश के लोग मांस (Meat ) का सेवन करते हैं।

दुनिया में कई देश तो ऐसे हैं जहां ज्यादातर लोग मांस ही खाते हैं। इस वजह से हर साल बड़ी संख्या में जानवरों को भी मारा जाता है। हर साल मांस के लिए मारे जाने वाले जानवरों के बारे में हाल ही में एक चौंका देने वाला खुलासा हुआ है।

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल 100 बिलियन से ज़्यादा जानवरों को खाया जाता है। इसके लिए उन्हें मारा जाता है और फिर उनका मांस निकालकर बेचा जाता है। यह आंकड़ा हैरान करने वाला है।

VEGAN कौन होते हैं?

हालांकि दुनिया में शाकाहारी (Vegetarian) लोगों की भी कमी नहीं है और पिछले कुछ सालों में वीगन लोगों की संख्या भी बढ़ी है। वीगन उन लोगों को कहा जाता है जो न तो मांस खाते हैं और न ही जानवरों से मिलने वाले डेयरी उत्पाद। हालांकि इसके बावजूद मांसाहारी लोगों की संख्या में कुछ खास गिरावट नहीं हुई है।

दुनियाभर में कई तरह के जानवरों को खाया जाता है। पर सबसे ज्यादा डिमांड Chicken की रहती है। दुनियाभर में हर दिन करीब 205 Million Chicken को मारा जाता है और बाद में खाया जाता है। यानी कि एक साल में करीब 75 बिलियन चिकन को मारकर खाया जाता है। इस हिसाब से हर दिन दुनियाभर में एक मिनट में 1,40,000 चिकन को मारा जाता है।

सबसे ज्यादा मांस चीन में खाया जाता है

सबसे ज्यादा मांस चीन में खाया जाता है। जनसंख्या के मामले में कुछ समय पहले तक चीन का पहला स्थान था, पर पिछले साल इस मामले में India ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। पर बात जब मांस खाने वालों की होती है, तो इस मामले में चीन सबसे आगे है। China की आबादी का बहुत ही कम हिस्सा है जो मांस का सेवन नहीं करता।

चीन में तो कीड़े-मकोड़ों तक का मांस खाया जाता है। भारत भले ही जनसंख्या के मामले में सबसे आगे हो, पर मांस के सेवन के मामले में काफी पीछे हैं। दुनियाभर में खाए जाने वाले मांस (Meat) का बहुत सीमित अंश ही भारत के लोग खाते हैं।

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