दीनानाथ पांडेय ने अपनी राह खुद चुनी, उस पर चले और इतिहास बना गये : सरयू राय

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जमशेदपुर : श्रद्धेय दीनानाथ पांडेय स्मारक समिति के तत्वावधान में रविवार को उनकी पुण्यतिथि पर असंगठित क्षेत्र के 150 से ज्यादा श्रमिकों का सम्मान किया गया। यह आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय बारात भवन परिसर में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में स्वर्गीय दीनानाथ पांडेय की प्रतिमा पर अतिथियों की ओर से माल्यार्पण किया गया। इसके बाद कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय थे। विशिष्ट अतिथि के रुप में यूनियन लीडर राकेश्वर पांडेय, टुन्नू चौधरी, चंदेश्वर खां, सुबोध श्रीवास्तव, यूनियन लीडर अमित सिंह, आरके सिंह, रामनारायण शर्मा और शिवशंकर सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम के संयोजक भाजपा नेता अमित शर्मा थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राकेश्वर पांडेय ने कहा कि दीनानाथ पांडेय वक्त देख कर काम नहीं करते थे। वह 103 डिग्री बुखार में भी लोगों का काम करने के लिए तत्पर रहते थे। वह मजदूरों का हर हाल में कल्याण करने की कामना करते थे। बेहद ईमानदार थे। टेम्पू से भी सफर करने में उन्हें गुरेज नहीं था।

मुख्य अतिथि के तौर पर सरयू राय ने कहा कि दीनानाथ पांडेय एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने अपनी राह खुद चुनी, उस पर चले और इतिहास बना गये। उन्होंने मजदूरों के क्षेत्र में और राजनीति के क्षेत्र में भी जबरदस्त काम किया।

सरयू राय ने कहा कि दीनानाथ पांडेय बेहद सहज, बेहद सरल, गंवई अंदाज में बात करने वाले नेता थे। विधानसभा में जिस तरीके से वह अपनी बातों को रखते थे, लोग उनके कायल हो जाते थे। आज उनके नहीं रहने पर भी लोग उन्हें बेहद सम्मान से याद करते हैं।

श्री राय ने कहा कि मजदूर हितों के लिए वह संघर्ष करते रहे। उन्हें टाटा स्टील ने नौकरी से निकाल दिया, लेकिन वह अपने हिसाब से ही चले। उन्होंने मजदूरों का कल्याण अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा।

श्री राय ने कहा कि पहले के श्रम कानून अलग थे। अब नियमों में भारी बदलाव हुआ है। लहजा बदला है, हालात बदले हैं लेकिन मजदूर हितों का आज भी ख्याल रखा जाता है। ख्याल रखने का तरीका वही है, जो दीनानाथ पांडेय का था।

सरयू राय ने कहा कि यह ठीक है कि दीनानाथ पांडेय ने मजदूर हितों की रक्षा करने के लिए बड़ी लंबी लकीर खींच दी थी लेकिन आज के मजदूर नेता उस लकीर के हिसाब से ही चल रहे हैं। मजदूरों का कल्याण हो, यह ध्येय आज भी है। रोज-रोज नियमों में परिवर्तन हो रहा है। मुनाफा कैसे बढ़े, यह ध्येय हो गया है। नियम और परंपराएं बदल चुकी हैं। असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों का मामला उसी हिसाब से उठता है, जो दीनानाथ पांडेय जी की भाव और भावना के अनुरुप होता है। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की समस्याओं का समाधान करने में भी परंपराओं का परिवर्तन देखने को मिलता है, नियमों-कानूनों में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। ठेकों पर आने वाले मजदूरों का ख्याल रखना भी जरूरी है। यह काम मजदूर नेता करेंगे, ऐसा पक्का यकीन है। मजदूर, उद्योग और सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। सुरक्षा सर्वोपरि है। श्रमिक हितों को बेहतर तरीके से पूर्ण करना बड़ी चुनौती है। इसे करना ही होगा। असंगठित मजदूरों के क्षेत्र में भी नियम-कानून बन रहे हैं। उनके हितों का भी ध्यान रखना होगा।
सरयू राय ने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में भी दीनानाथ पांडेय ने जो रास्ता दिखाया, उस पर हमें चलने का प्रयास करना चाहिए। मजदूर नेता और लोकप्रिय विधायक के रुप में उन्होंने जो कुछ भी किया, वह अनुकरणीय है। धन्यवाद ज्ञापन आशुतोष राय ने किया। मंच संचालन पप्पू राव और अमरेश राय ने किया।

कार्यक्रम में स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी और वरीय जदयू नेता आशुतोष राय ने कहा कि दीनानाथ पांडेय की प्रतिमा लगाने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा, यह लोग भूले नहीं हैं। लेकिन, यह संघर्ष रंग लाया और आज हम लोग जहां इस कार्यक्रम में बैठे हैं, वहां दीना बाबा की शानदार प्रतिमा स्थापित है। हम लोगों ने तय किया था कि प्रतिमा हर हाल में लगाएंगे क्योंकि बात हिंदू हृदय सम्राट दीनानाथ बाबा के सम्मान से जुड़ी थी, उन्हें सम्मान देने के लिए ही प्रतिमा की स्थापना की गई।

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