CGRF में नई नियुक्ति पर हाई कोर्ट की रोक, पहले वर्तमान सदस्यों के काम का मूल्यांकन करने का निर्देश

Archana Ekka
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रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच (CGRF) रांची और चाईबासा में सेकेंड मेंबर के पद पर नई नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि नए सदस्यों की नियुक्ति से पहले वर्तमान में कार्यरत सदस्यों के काम का मूल्यांकन करना जरूरी है। यह फैसला न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने प्रमोद कुमार और अन्य की याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया। कोर्ट के इस निर्णय को CGRF की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विज्ञापन संख्या 03/2025 को किया गया रद्द

अदालत ने 7 अगस्त 2025 को जारी विज्ञापन संख्या 03/2025 को रद्द कर दिया। यह विज्ञापन झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) द्वारा जारी किया गया था, जिसमें CGRF रांची और चाईबासा में सेकेंड मेंबर के पद के लिए आवेदन मांगे गए थे। अदालत ने कहा कि बिना वर्तमान सदस्यों के कार्य का मूल्यांकन किए नए पदों के लिए विज्ञापन जारी करना उचित नहीं है। इसलिए इस प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने उठाया था सवाल

मामले में याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि JBVNL ने नए सदस्यों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया, जबकि वर्तमान सेकेंड मेंबर के कार्यकाल के विस्तार को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया था। उनका कहना था कि यह कदम नियमों के विपरीत है और इससे मौजूदा सदस्यों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने कोर्ट से हस्तक्षेप करने की मांग की थी।

नियमों के अनुसार पहले मूल्यांकन जरूरी

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि JHERC विनियम 2020 के अनुसार CGRF के सदस्यों का प्रारंभिक कार्यकाल तीन साल का होता है। यदि उनका कार्य संतोषजनक पाया जाता है तो इसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है। अदालत ने कहा कि पहले वर्तमान सदस्यों के काम का सही तरीके से मूल्यांकन होना चाहिए। अगर उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तभी नए सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

फोरम की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि CGRF एक ऐसा मंच है जहां उपभोक्ताओं और बिजली वितरण कंपनी के बीच होने वाले विवादों का समाधान किया जाता है। ऐसे में इस मंच की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखना बहुत जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना उचित मूल्यांकन के किसी सदस्य के कार्यकाल को समाप्त करना सही नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश

अंत में अदालत ने निर्देश दिया कि पहले वर्तमान सेकेंड मेंबर के कार्य का मूल्यांकन किया जाए। यदि उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तभी नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाए। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए इस मामले का निपटारा कर दिया।

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