इतिहास के झरोखे से : जमशेदपुर का पहला होटल है बुलेवर्ड, अनोखी प्रेमकथा का प्रतीक है सर दोराबजी पार्क | Boulevard Hotel Jamshedpur

जमशेदपुर का गौरवशाली इतिहास पढ़िए - पहला होटल बुलेवर्ड से लेकर सर दोराबजी पार्क की अनोखी प्रेमकथा तक, जहां हर धरोहर शहर की विरासत और टाटा युग की कहानी बयां करती है।

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जमशेदपुर : लौहनगरी जमशेदपुर की समृद्ध विरासत ही इसकी पहचान है। 104 साल पुराने इस शहर में ऐसे कई धरोहर हैं, जिसे आज भी देख आप दंग रह जाएंगे। शहर का पहला होटल बुलेवर्ड हो या फिर पहला चर्च सेंट जोसेफ चर्च। रीगल बिल्डिंग से लेकर एक्सएलआरआइ व एनएमएल, टाटानगर स्टेशन से लेकर टीएमएच, सभी भवन अपने आप में इतिहास समेटे हैं। तो आइए आज इस शहर के इतिहास पर नजर डालते हैं।

जमशेदपुर का पहला होटल बुलेवर्ड है। यह होटल बिष्टुपुर थाना के बगल में स्थित है, जिसका निर्माण 1919 को गोवा से एक उद्यमी ठेकेदार बार्थोलोम्यू डी-कोस्टा ने की थी।1940 में 45 हजार रुपये की लागत से इस होटल को छह महीने में बनाया गया था। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इस होटल में 28 अंग्रेज और अमेरिकन पायलट 18 महीने तक यहां रुके थे।

अनोखी प्रेम कथा का प्रतीक है सर दोराबजी पार्क

बिष्टुपुर के कीनन स्टेडियम के सामने इस पार्क में जेएन टाटा के बेटे सर दोराबजी टाटा और उनकी पत्नी मेहरबाई टाटा की प्रतिमा स्थापित है। लगभग 2.5 एकड़ में फैले इस पार्क में विशाल डायमंड स्ट्रक्चर भी है, जो इनकी अनोखी प्रेम कथा का प्रतीक है।

सेंट जार्ज चर्च शहर का एकमात्र प्रोटेस्टेंट चर्च

प्रथम विश्वयुद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में बना सेंट जार्ज चर्च बिष्टुपुर बी रोड में है सेंट जार्ज चर्च। इसका निर्माण कार्य 16 अप्रैल, 1916 में पूरा हुआ। यह शहर का एकमात्र प्रोटेस्टेंट चर्च है, जहां आज भी अंग्रेजी में प्रार्थना होती है।

आर्मरी ग्राउंड में तैनात थी स्वदेशी तोप

आर्मरी ग्राउंड बिष्टुपुर के सेंट्रल वाटर वर्क्स के सामने स्थित है। 15 सितंबर, 1941 में गोलमुरी लाइन में बिहार रेजिमेंट की पहली बटालियन का गठन हुआ था। इस रेजिमेंट को विश्वयुद्ध के समय विमानों के संभावित हमले से टाटा स्टील प्लांट को बचाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

तत्कालीन वायसराय लार्ड वेवेल के जमशेदपुर दौरे के समय स्वदेशी तोप को नार्दर्न टाउन स्थित के जिस मैदान में प्रदर्शित किया। उसे इसी कारण आर्मरी ग्राउंड के नाम से जाना जाता है।

महात्मा गांधी व सुभाष चंद्र बोस ने यूनाइटेड क्लब में की थी बैठक

बिष्टुपुर में आर्मरी ग्राउंड के सामने स्थित है यूनाइटेड क्लब, जिसकी स्थापना वर्ष 1914 में की गई थी। कंपनी की स्थापना के समय यहां कई विदेशी नागरिक हुआ करते थे।

इस क्लब का पहले टिस्को इंस्टीट्यूट नाम था, जिसे 1948 में बदलकर यूनाइटेड क्लब रखा गया। महात्मा गांधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने जमशेदपुर प्रवास के दौरान यहीं कर्मचारियों के साथ सामूहिक बैठक की थी।

डायरेक्टर्स बंगले में रुका करते थे दोराबजी टाटा

बिष्टुपुर में यूनाइटेड क्लब के सामने 1918 में डायरेक्टर्स बंगला बनाया गया। इस बंगले को इंडो-सारसेनिक स्टाइल यानी भारत और अरब की कला को मिलाकर तैयार किया गया है।

कंपनी के डायरेक्टर्स शहर आने पर यहीं ठहरते थे। शुरुआती दिनों में सर दोराबजी टाटा यहीं आकर रुकते थे। पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित कई बड़ी हस्तियां यहां ठहर चुकी हैं।

पारसी युवाओं के लिए बना था भरूचा मेंशन

भरूचा मेंशन बिष्टुपुर थाने के ठीक सामने है, जिसे हम रीगल बिल्डिंग के नाम से भी जानते हैं। टाटा स्टील के पहले भारतीय चीफ कैशियर खुर्शीद मानेकजी भरूचा ने 1935 में टाटा स्टील में काम करने आए बाहरी पारसी युवाओं को घर का अनुभव देने के लिए भरूचा मेंशन का निर्माण कराया था।

स्टेशन तक सुनाई देती थी क्लॉक टॉवर की आवाज

क्लॉक टॉवर गोलमुरी गोल्फ ग्राउंड मैदान में स्थित है। चार घुमावदार घड़ियों के साथ 70 फीट ऊंचे इस क्लॉक टॉवर को एंग्लो स्विस वाच कंपनी द्वारा तैयार किया गया था। चार मार्च, 1939 को टिनप्लेट कंपनी ऑफ इंडिया के पहले महाप्रबंधक जॉन लेशोन के सेवाकाल के 16 साल पूरे होने के उपलक्ष्य पर इस क्लॉक टॉवर की स्थापना की गई थी। कहा जाता है कि इस घड़ी की बेल की आवाज स्टेशन और सोनारी तक सुनाई पड़ती थी।

दूसरे विश्वयुद्ध में हमले से बचने के लिए बना था आइएसडब्ल्यूपी बंकर

इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (आइएसडब्ल्यूपी) की स्थापना सरदार बहादुर इंदर सिंह ने 1920 में की थी। उस समय कंपनी 300 एकड़ में फैली हुई थी। इस कंपनी के ठीक सामने है एक विशाल बंकर। जिसे दूसरे विश्वयुद्ध के समय बनाया गया था। दूसरे विश्वयुद्ध के समय दुश्मन देशों के जहाज आने की सूचना पर पूरे शहर में सायरन बजता था।

टाटा मोटर्स से पहले यहां थी पेनसेल्वेनिया की कंपनी, बनाती थी रोड रोलर

टाटा मोटर्स भले ही कंपनी का पहला मदर प्लांट हो, लेकिन यहां 1930 में पेनसल्वेनिया कंपनी हुआ करती थी, जो रोड रोलर बनाती थी लेकिन कंपनी घाटे में चली गई। जेआरडी टाटा और सुमंत मूलगांवकर की मुलाकात जर्मनी में कंपनी के मालिक से हुई और उन्होंने इसे खरीद लिया।

देश का पहला फुटबाल नर्सरी टाटा फुटबाल अकादमी

36 साल पहले टाटा स्टील ने शहर में देश का पहला फुटबाल अकादमी की स्थापना की थी। 1987 में टाटा फुटबाल अकादमी का गठन किया गया था। तब से लेकर आजतक इस अकादमी ने देश को 200 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय फुटबालर दिए हैं।

जमशेदपुर एफसी से जुड़े मोबासिर रहमान हों या भारतीय फुटबाल का स्पाइडरमैन कहे जाने वाले सुब्रतो पाल, सभी ने टाटा फुटबाल अकादमी से प्रशिक्षण लिया।

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