अब एक ब्लड टेस्ट से 15 साल पहले पता चलेगा हार्ट डिजीज का खतरा

Manu Shrivastava
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अब एक ब्लड टेस्ट से 15 साल पहले पता चलेगा हार्टदिल की बीमारियां दुनिया भर में मौत का एक बड़ा कारण बन चुकी हैं। अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा एआई पावर्ड ब्लड टेस्ट विकसित किया है, जो भविष्य में होने वाली हार्ट डिजीज का खतरा वर्षों पहले ही बता सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ हांग कांग के एलकेसी फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर्स द्वारा तैयार किए गए इस टूल का नाम ‘कार्डियोमिकस्कोर’ रखा गया है। यह तकनीक एक साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए व्यक्ति में भविष्य में होने वाली गंभीर कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों की आशंका का पता लगाने में मदद करेगी।

 

6 बड़ी हार्ट बीमारियों का लगाएगा पता

 

कार्डियोमिकस्कोर सिर्फ हार्ट अटैक ही नहीं, बल्कि छह प्रमुख हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे का अनुमान लगा सकता है। इनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, एट्रियल फिब्रिलेशन, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज और वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म शामिल हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह टूल बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने से लगभग 15 साल पहले ही जोखिम का संकेत दे सकता है।

 

बीमारी शुरू होने से पहले मिलेगा अलर्ट

 

मौजूदा हेल्थ चेकअप में आमतौर पर उम्र, ब्लड प्रेशर, धूम्रपान और अन्य मेडिकल फैक्टर्स के आधार पर हार्ट डिजीज का रिस्क आंका जाता है। लेकिन कार्डियोमिकस्कोर शरीर में होने वाले मॉलिक्यूलर बदलावों को पहचानकर पहले ही चेतावनी देने में सक्षम है। इससे डॉक्टर और मरीज समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव कर बीमारी के खतरे को कम कर सकते हैं।

 

ऐसे काम करता है कार्डियोमिकस्कोर

 

यह एआई सिस्टम ब्लड सैंपल में मौजूद सर्कुलेटिंग प्रोटीन और 168 मेटाबोलाइट्स का विश्लेषण करता है। रिसर्च में यूके बायोबैंक के पॉपुलेशन डेटा का उपयोग किया गया। वैज्ञानिकों ने करीब 2,920 मॉलिक्यूलर सिग्नल्स का अध्ययन किया, जो इम्यून सिस्टम, मेटाबॉलिज्म और ब्लड वेसल्स की स्थिति में होने वाले बदलावों को दर्शाते हैं। इन डेटा के आधार पर एआई भविष्य में दिल की बीमारी के खतरे का अनुमान लगाता है।

 

समय रहते बचाव की उम्मीद

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में हार्ट डिजीज की रोकथाम में बड़ी भूमिका निभा सकती है। समय पर पहचान होने से लोग अपने खानपान, व्यायाम और जीवनशैली में सुधार कर गंभीर बीमारी से बच सकते हैं।

 

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