आखिर क्यों फैलती है जम्हाई? जानिए इसके पीछे छिपा वैज्ञानिक कारण

Manu Shrivastava
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जम्हाई लेना इंसानों की एक बेहद सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है। आमतौर पर एक व्यक्ति दिन में 6 से 23 बार तक जम्हाई लेता है। यह केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जानवर भी जम्हाई लेते हैं। जम्हाई के दौरान व्यक्ति अपना मुंह खोलता है, गहरी सांस लेता है और अनजाने में हवा अंदर खींचता है। यह अक्सर थकान, नींद, ऊब या जागने के समय अधिक होती है।

क्यों आती है दूसरे को देखकर जम्हाई?

अक्सर आपने देखा होगा कि यदि कोई व्यक्ति आपके सामने जम्हाई लेता है, तो आपको भी जम्हाई आने लगती है। वैज्ञानिक इसे “कॉन्टेजियस यॉनिंग” यानी संक्रामक जम्हाई कहते हैं। शोध के अनुसार यह आदत जन्मजात नहीं होती, बल्कि बच्चे इसे धीरे-धीरे सीखते हैं। लगभग चार से पांच साल की उम्र में बच्चे दूसरों की भावनाओं को समझना शुरू करते हैं और तभी यह प्रतिक्रिया विकसित होती है।

भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ी है जम्हाई

वैज्ञानिकों का मानना है कि लोग अधिकतर उन लोगों को देखकर जम्हाई लेते हैं, जिनसे उनका भावनात्मक संबंध होता है, जैसे दोस्त, परिवार या करीबी व्यक्ति। जब हम किसी परिचित को जम्हाई लेते देखते हैं, तो हमारा दिमाग उनकी भावनाओं को महसूस करता है और उसी तरह प्रतिक्रिया देता है। यही कारण है कि यह प्रक्रिया सामाजिक जुड़ाव और सहानुभूति से भी जुड़ी मानी जाती है।

मिरर न्यूरॉन्स निभाते हैं अहम भूमिका

हमारे मस्तिष्क में मौजूद विशेष कोशिकाएं, जिन्हें ‘मिरर न्यूरॉन्स’ कहा जाता है, इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये न्यूरॉन्स तब सक्रिय हो जाते हैं, जब हम किसी को कोई काम करते हुए देखते हैं। इसके बाद हमारा दिमाग उसी क्रिया की नकल करने लगता है। यही वजह है कि किसी को जम्हाई लेते देखकर हमें भी जम्हाई आने लगती है.

जानवरों में भी होती है यह प्रतिक्रिया

दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि कुत्ते, चिम्पांजी, पक्षी, सरीसृप और कुछ मछलियां भी जम्हाई लेती हैं। कई जानवर एक-दूसरे को देखकर जम्हाई लेने लगते हैं। यहां तक कि इंसानों को अपने पालतू जानवरों को देखकर भी जम्हाई आ सकती है। इससे यह संकेत मिलता है कि जम्हाई सामाजिक संबंध और भावनात्मक समझ का हिस्सा हो सकती है।

क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

विशेषज्ञों के अनुसार जम्हाई केवल थकान का संकेत नहीं, बल्कि यह दिमागी गतिविधि और सामाजिक व्यवहार से भी जुड़ी प्रक्रिया है। यह हमारे दिमाग को दूसरों की भावनाओं और व्यवहार से जोड़ने का एक तरीका माना जाता है।

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