
Jharkhand Rojgar Sevak Strike : झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के बैनर तले रोजगार सेवकों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। 12 मार्च से शुरू हुआ यह आंदोलन सोमवार को 84वें दिन में प्रवेश कर गया। रोजगार सेवक अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर जिला समाहरणालय (डीसी कार्यालय) के बाहर धरने पर बैठे हैं और सरकार पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
संघ के जिला अध्यक्ष संतोष कुमार ने कहा कि रोजगार सेवक पिछले 84 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दो वर्ष पहले हुए लिखित समझौते की शर्तों को भी लागू नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि जिले में एक भी रोजगार सेवक फिलहाल कार्य पर नहीं है, जिससे मनरेगा समेत कई विकास योजनाओं का काम प्रभावित हो रहा है।
क्या हैं रोजगार सेवकों की तीन प्रमुख मांगें?
रोजगार सेवकों ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं
1. ग्रेड-पे के साथ स्थायी समायोजन (नियमितीकरण) किया जाए।
2. मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाए।
3. मृत्यु या दुर्घटना की स्थिति में उचित मुआवजा देने का प्रावधान किया जाए।
कम मानदेय से नाराज कर्मचारी
संघ के जिला उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा कि रोजगार सेवकों को 10 से 12 हजार रुपये के मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। कई कर्मियों को समय पर मानदेय भी नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
वहीं धरनारत रोजगार सेवक सारथी मुर्मू ने कहा कि कम मानदेय के बावजूद उन्हें ब्लॉक स्तर की कई योजनाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
रोजगार सेवकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।

