
धनबाद : दोपहर के लगभग तीन बजे का समय था। जुम्मे की नमाज के कारण कई लोग मस्जिदों में थे, जबकि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं घरों में आराम कर रहे थे। तभी अचानक तेज़ कंपन के साथ जमीन फटने लगी और देखते ही देखते कई घर पाताल में समाने लगे। कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में कुछ ही क्षणों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी से पूरा छाताबाद इलाका दहल उठा। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागे। कई परिवारों ने किसी तरह बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित निकाला। इस हादसे में करीब एक दर्जन लोग घायल हुए हैं।
भू-धंसान की इस भयावह घटना में दो दर्जन से अधिक घर प्रभावित हुए हैं। छाताबाद का फुटबॉल मैदान और लगभग 300 मीटर लंबी सड़क करीब 10 फीट नीचे धंस गई है। कई मकान तिरछे हो गए हैं, बिजली के खंभे झुक गए हैं और पूरे इलाके में बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। प्रभावित परिवार लगातार अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।
घटना की सूचना मिलते ही कतरास समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। प्रशासनिक अधिकारियों ने हालात का जायजा लिया, जबकि बीसीसीएल की माइंस रेस्क्यू टीम भी राहत एवं बचाव कार्य में जुट गई। इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर लोगों को खतरे वाले क्षेत्र से हटाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह प्राकृतिक नहीं बल्कि मानवजनित आपदा है। उनका कहना है कि बीसीसीएल की लगातार ब्लास्टिंग, डीजीएमएस की अनदेखी और वर्षों से चल रहे अवैध कोयला खनन ने जमीन को खोखला कर दिया, जिसका परिणाम आज पूरे छाताबाद को भुगतना पड़ रहा है। लोगों ने सुरक्षित पुनर्वास, उचित मुआवजा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय पार्षद मो. शहाबुद्दीन अंसारी ने इस तबाही के लिए सीधे तौर पर बीसीसीएल की ब्लास्टिंग और अवैध खनन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि अवैध खनन के कारण लगभग 20 घर उजड़ गए हैं और समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।
छाताबाद में भूधसान कोई नई नहीं।
छाताबाद में भूधसान की घटनाएं नई नहीं हैं। वर्षों से स्थानीय लोग जमीन धंसने, अवैध खनन और ब्लास्टिंग को लेकर शिकायत करते रहे हैं। सवाल यह है कि जब इलाके को संवेदनशील माना जाता रहा है, तब सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए? क्या जिम्मेदार एजेंसियों की लापरवाही ने एक बार फिर आम लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया? अब सभी की नजर प्रशासन, बीसीसीएल और डीजीएमएस की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।
प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता
सबसे बड़ा सवाल अब उन परिवारों के सामने है जिनके घर पल भर में रहने लायक नहीं बचे। सिर पर छत का संकट, बच्चों की सुरक्षा, रोजमर्रा की जरूरतें और भविष्य की अनिश्चितता ने लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि प्रभावित परिवारों का तत्काल सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास किया जाए, पर्याप्त मुआवजा दिया जाए और पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे कराकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जाए।

