
नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के पन्ना जिले को यूं ही हीरों की नगरी नहीं कहा जाता है। यहां कब और किसकी किस्मत रातों-रात बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन है। इस बार पन्ना के सरकोहा गांव के सात मजदूरों पर कुदरत और भाग्य दोनों मेहरबान हुए हैं।
रोजमर्रा की दो वक्त की रोटी के लिए कड़ी मेहनत-मजदूरी करने वाले इन सातों मजदूरों को खेत की एक खदान से 16.96 कैरेट का एक बेशकीमती हीरा मिला है।
इस नायाब खोज ने न केवल उनकी आर्थिक परेशानियों को दूर करने की उम्मीद जगाई है, बल्कि उनके उन अधूरे सपनों को भी नया पंख दे दिया है, जिन्हें वे बरसों से संजोए बैठे थे।
घटना पन्ना के सरकोहा गांव की है, जहां एक हीरा खदान का संचालन किया जा रहा था। इसी खदान में काम कर रहे सात मजदूरों की किस्मत उस वक्त पलट गई, जब वे बारिश के बीच खदान की चाल का निरीक्षण कर रहे थे। पट्टा धारक अखिलेश पाल की नजर अचानक मिट्टी के बीच से चमक रही एक खास चीज पर पड़ी। पास जाकर देखा तो वह कोई आम पत्थर नहीं, बल्कि एक चमकता हुआ हीरा था। हीरा मिलने की यह खबर जैसे ही गांव और आसपास के इलाकों में फैली, मजदूरों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
जानकारों और हीरा कार्यालय के अनुमान के मुताबिक, मिले हुए इस हीरे की कीमत 50 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है। हालांकि, इसकी वास्तविक और सटीक कीमत शासकीय नीलामी (Auction) प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी।
नियमानुसार, हीरे की नीलामी से मिलने वाली कुल राशि में से सरकार द्वारा निर्धारित रॉयल्टी काटने के बाद जो शेष रकम बचेगी, उसे सभी सातों पार्टनरों के बीच बराबर-बराबर बांट दिया जाएगा।

