

रांची: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026’ को लेकर झारखंड सरकार और केंद्र के बीच राजनीतिक व संवैधानिक टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार इस विधेयक के विरोध में विधानसभा का विशेष सत्र बुला सकती है। प्रोजेक्ट भवन में कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मुद्दे को केवल केंद्र के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने तक सीमित नहीं रखेगी। इसे राज्य के अधिकारों, वित्तीय स्वायत्तता और संघीय ढांचे से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएमडीआर एक्ट में किए गए बदलावों को लेकर जल्द ही राज्य कैबिनेट की एक और बैठक होगी और जरूरत पड़ने पर विधानसभा का विशेष सत्र भी आहुत किया जा सकता है।





राजस्व और जन कल्याणकारी योजनाओं पर असर
राज्य सरकार की मुख्य चिंता खनिज क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व में संभावित नुकसान को लेकर है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन विभाग को ₹18,730.91 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जिसमें ₹7,487.91 करोड़ केवल ‘मिनरल बेयरिंग लैंड सेस’ से मिले थे। वहीं, वर्ष 2024-25 में कुल वसूली ₹11,848.15 करोड़ थी, जिसमें सेस का योगदान करीब ₹1,380 करोड़ रहा था। सरकार का मानना है कि संशोधन विधेयक से राज्यों की सेस लगाने और खनिज-धारक भूमि पर अधिकार सीमित हो सकते हैं, जिसका सीधा प्रभाव मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास, पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की फंडिंग पर पड़ेगा।
झामुमो की सड़क से सदन तक आंदोलन की तैयारी
विधेयक के खिलाफ सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। 20 अगस्त को रांची के हरमू स्थित सोहराय भवन में पार्टी की विस्तारित केंद्रीय समिति की बैठक बुलाई गई है, जिसमें जिलावार आंदोलन और चरणबद्ध कार्यक्रमों पर निर्णय लिया जाएगा। पार्टी पहले ही जन-जागरण अभियान, धरना-प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी दे चुकी है।
