

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा।





भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ हरिश्रन देवगन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में 19 अप्रैल को हुई JPSC प्रारंभिक परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता ने परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध CBI जांच की मांग की है। साथ ही परीक्षा से जुड़े भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की भी मांग की गई है।
मामला ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। सरकार की ओर से 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश के बाद आंदोलन को 19 अगस्त को फिलहाल स्थगित किया गया था। हालांकि, अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है।
इधर, 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब भी मांगा है।
JPSC प्रारंभिक परीक्षा को लेकर 2 जुलाई को रिजल्ट जारी होने के बाद भी सवाल उठे थे। याचिका में एक कथित OMR कार्बन कॉपी का हवाला देते हुए परीक्षा में अनियमितता की आशंका जताई गई है। हालांकि, याचिका में यह भी कहा गया है कि दस्तावेज की प्रामाणिकता अभी निर्णायक रूप से साबित नहीं हुई है और इसकी फोरेंसिक जांच जरूरी है।
इस मामले में झारखंड CID ने भी कथित अनियमितताओं को लेकर केस दर्ज किया है। प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की OMR शीट की कार्बन कॉपी जमा करने को कहा गया था।
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। CBI जांच की मांग पर अदालत क्या रुख अपनाती है, इससे JPSC-JSSC विवाद को लेकर आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।
