


डेस्क : देर रात अपने बड़े भाई और प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू जी के निधन की दुखद खबर मिली। इस खबर को स्वीकार करना मेरे लिए बेहद मुश्किल है। सोनू भैया का यूं चले जाना मेरे जीवन में ऐसी कमी छोड़ गया है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं। सोनू भैया मेरे लिए केवल वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहयोगी नहीं थे। उनका रिश्ता मेरे साथ बड़े भाई जैसा था। वे हमेशा स्नेह देते थे, सही राह दिखाते थे और मुश्किल वक्त में मजबूती से मेरे साथ खड़े रहते थे। उनके साथ बिताया हर पल और उनसे मिली हर सीख हमेशा मेरे साथ रहेगी।





झारखंड आंदोलन के समय से ही सोनू भैया स्मृति-शेष बाबा दिशोम गुरुजी के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्पित सिपाही के तौर पर उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई के लिए लगा दिया। झारखंडियत के प्रति उनका समर्पण और संघर्ष का उनका जज्बा हमेशा याद किया जाएगा।
आज उन्हें याद करते हुए बार-बार यही ख्याल आता है कि जिंदगी कितनी क्षणभंगुर है। कल तक जिस आवाज को हम अपने बीच सुन रहे थे, आज वही आवाज सिर्फ यादों में रह गई है। सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए सिर्फ एक राजनीतिक साथी को खोना नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत क्षति है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी। आपका स्नेह, आपका संघर्ष और झारखंड के प्रति आपकी प्रतिबद्धता मैं जीवनभर अपने साथ लेकर चलूंगा।
आप हमेशा याद आएंगे भैया…
