PhD registration: विश्वविद्यालय अब उन शोधार्थियों के रजिस्ट्रेशन पर PhD Regulation 2009 के तहत विचार करेगा, जिनकी शोध प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन नियमों में बदलाव के संक्रमण काल के कारण उनका प्री-रजिस्ट्रेशन सेमिनार नहीं हो सका।
विश्वविद्यालय के अनुसार, ऐसे शोधार्थियों का कोर्स वर्क, इंटरनल डीआरसी या डीआरसी और रिसर्च टॉपिक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया संबंधित विभागों में पहले ही पूरी हो चुकी है।
बाद में PhD Regulation 2009 की जगह Regulation 2022 और नए SOP लागू होने की प्रक्रिया के दौरान कुछ शोधार्थियों का प्री-रजिस्ट्रेशन सेमिनार आयोजित नहीं हो पाया।
ऐसे में शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने और शोधार्थियों को किसी तरह का नुकसान न हो, इसके लिए विश्वविद्यालय ने संबंधित विभागाध्यक्षों से ऐसे शोधार्थियों की सूची तैयार करने को कहा है।
हालांकि, रजिस्ट्रेशन तय शर्तों की पूर्ति, विभागाध्यक्ष द्वारा सत्यापन और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद ही किया जाएगा।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था उन्हीं शोधार्थियों के लिए लागू होगी, जिनकी पीएचडी प्रक्रिया Regulation 2009 के तहत पहले से शुरू हो चुकी थी और संक्रमण अवधि के कारण उनका प्री-रजिस्ट्रेशन सेमिनार नहीं हो सका।

