Vishwakarma Puja 2026: विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत की सनातन परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के महान शिल्पकार, वास्तुकार एवं निर्माण-कला के अधिष्ठाता देवता के रूप में पूजा जाता है। प्रत्येक वर्ष कन्या संक्रांति, अर्थात सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है।

यह पर्व प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से कारखानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, निर्माण संस्थानों, कार्यशालाओं, तकनीकी संस्थानों तथा दुकानों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा देवताओं के दिव्य वास्तुकार और शिल्पकार हैं।
उन्होंने देवताओं के लिए अनेक भव्य भवनों, अस्त्र-शस्त्रों और दिव्य नगरों का निर्माण किया। विभिन्न पुराणों और धार्मिक परंपराओं में उनके द्वारा स्वर्गलोक, इंद्रपुरी, द्वारका तथा लंका जैसे दिव्य नगरों के निर्माण से संबंधित कथाएं मिलती हैं।
इसी कारण उन्हें निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी दक्षता का प्रतीक माना जाता है।विश्वकर्मा पूजा का मूल उद्देश्य उन साधनों, औजारों, मशीनों और उपकरणों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है, जिनके माध्यम से मनुष्य अपने श्रम और कौशल से निर्माण एवं उत्पादन करता है। इस दिन कारीगर, अभियंता, तकनीशियन, श्रमिक, उद्योगपति और व्यवसायी अपने कार्यस्थल तथा उपकरणों की विधिवत पूजा करते हैं।
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारखानों एवं प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई कर मशीनों और औजारों को सजाया जाता है। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधि-विधान से पूजा, हवन एवं आरती की जाती है। कई स्थानों पर श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए प्रसाद एवं भंडारे का भी आयोजन किया जाता है।
यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रम, हुनर, तकनीक और उत्पादन के महत्व को भी रेखांकित करता है। यह संदेश देता है कि किसी भी निर्माण कार्य की सफलता के पीछे श्रमिकों, कारीगरों और तकनीकी विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। कार्यस्थल पर सुरक्षा, अनुशासन और मशीनों के उचित रखरखाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी यह उपयुक्त अवसर है।
विश्वकर्मा पूजा का प्रमुख संदेश है कि श्रम का सम्मान, कौशल का विकास और तकनीक का सदुपयोग ही प्रगति का आधार है। यह पर्व मनुष्य को ईमानदारी,लगन, सृजनशीलता और कर्मनिष्ठा के साथ अपने कार्य को करने की प्रेरणा देता है। आधुनिक युग में जब विज्ञान और तकनीक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं, तब विश्वकर्मा पूजा की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।
इस प्रकार भगवान विश्वकर्मा की आराधना केवल मशीनों और औजारों की पूजा नहीं, बल्कि सृजन की शक्ति, श्रम की गरिमा, तकनीकी ज्ञान और आत्मनिर्भरता के प्रति सम्मान का पर्व है। यह पर्व समाज को कर्म, कौशल और रचनात्मकता के माध्यम से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने की प्रेरणा प्रदान करता है।
संजय सर्राफ


