नयी दिल्ली : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं के काम करने के तरीके और उनके असर दिखाने में लगने वाले समय को समझने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत किया जाना चाहिए, क्योंकि साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि होने से मरीजों का भरोसा बढ़ेगा और पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर अधिक स्वीकार्यता मिलेगी।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) द्वारा आयोजित ‘कौमारकोन 2026’ (कौमारभृत्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन) को संबोधित करते हुए, उन्होंने छात्रों और अनुसंधानकर्ताओं से आग्रह किया कि वे आयुर्वेदिक उपचारों की कार्यप्रणाली का अध्ययन करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से उनकी प्रभावशीलता को प्रमाणित करने में गहरी रुचि लें।


