रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के मामले में सीआईडी ने जेपीएससी परीक्षा घोटाला मामले में अदालत में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में एल खियांग्ते और टीडीपीएल को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सीआईडी की जांच में यह बात सामने आई है कि तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते ने ही प्रतिबंधित परीक्षा एजेंसी ‘टीडीपीएल’ (टीसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) को परीक्षा संबंधी काम सौंपा था। शिकायतों के बावजूद इन गड़बड़ियों को नजरअंदाज किया गया।

12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
सीआईडी ने एल खियांग्ते, श्वेता कुमारी गुप्ता, अभय कुमार तिवारी, टीडीपीएल निदेशक रामवीर सिंह, मो उस्मान, मो एबाद, हेमंत कुमार वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार, सोनू कुमार, अरविंद कुमार और सुमन सौरभ समेत कुल 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इन सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं।
चयन के नाम पर 5 से 25 लाख तक की वसूली
जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह का सरगना अभय कुमार तिवारी आयोग, परीक्षा एजेंसी और अभ्यर्थियों के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाता था। वह अभ्यर्थियों से परीक्षा में पास कराने के नाम पर 5 लाख और अंतिम चयन के लिए 10 से 25 लाख रुपये तक वसूलता था। उसके बैंक खातों से संदिग्ध लेन-देन के सबूत भी मिले हैं।
जांच के अनुसार, 26 मई 2026 को तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने परीक्षा की गोपनीय उत्तर कुंजी व्हाट्सएप के जरिए एजेंसी कर्मी मो उस्मान को भेजी थी। वन क्षेत्र पदाधिकारी (एफआरओ) और सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) परीक्षाओं में भी ओएमआर शीट और डिजिटल अंकों में हेरफेर कर अभ्यर्थियों को पास कराने के बड़े पैमाने पर सबूत मिले हैं।
जेपीएससी मामले में चार्जशीट दाखिल करने के बाद अब सीआईडी अगले 20 दिनों के भीतर जेएसएससी पेपर लीक मामले में भी आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही है। अदालत इस मामले में 26 अक्टूबर से आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के साथ सुनवाई शुरू कर सकती है, जिसके बाद सीआईडी पूरक आरोपपत्र भी दाखिल करेगी।


