नयी दिल्ली: अमेरिकी स्पिरिट कंपनी ब्राउन-फॉर्मन अगले पांच साल में भारत को अपने स्कॉच व्हिस्की पोर्टफोलियो के शीर्ष 10 बाजार में शामिल करना चाहती है। कंपनी को उम्मीद है कि भारत में प्रीमियम शराब की बढ़ती मांग, अंतरराष्ट्रीय व्हिस्की ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती रचि और भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से उसे विस्तार के नए अवसर मिलेंगे।

जैक डेनियल्स और वुडफोर्ड रिजर्व जैसे चर्चित ब्रांड का स्वामित्व रखने वाली ब्राउन-फॉर्मन ने इस साल मई में अपने प्रीमियम सिंगल माल्ट स्कॉच ब्रांड ‘द ग्लेनड्रोनाच’ के साथ भारतीय बाजार में कदम रखा था। अब कंपनी की योजना ‘बेनरियाक’ और उसके बाद ‘ग्लेंग्लासॉ’ को भी भारत में पेश करने की है।

ब्राउन-फॉर्मन के माल्ट्स एंड आयरिश के वैश्विक उपाध्यक्ष आदिप अग्रवाल ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि कंपनी अगले पांच साल में भारत को अपने स्कॉच पोर्टफोलियो के शीर्ष 10 बाजारों में देखना चाहती है। उनके मुताबिक, भारतीय बाजार में व्यापक अवसरों की संभावनाएं हैं और कंपनी इसका लाभ उठाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि लंबी अवधि में भारत ब्राउन-फॉर्मन की स्कॉच रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। कंपनी ने 2016 में द बेनरियाक डिस्टिलरी कंपनी का अधिग्रहण कर स्कॉच व्हिस्की कारोबार में प्रवेश किया था। इसके साथ ही ग्लेनड्रोनाच, बेनरियाक और ग्लेंग्लासॉ जैसे सिंगल माल्ट ब्रांड उसके पोर्टफोलियो में शामिल हुए।
कंपनी का मानना है कि भारत में शराब उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से बदल रही है। अब उपभोक्ता केवल कीमत के आधार पर खरीदारी नहीं कर रहे, बल्कि गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और उत्पाद की विशिष्टता को भी महत्व दे रहे हैं। इससे प्रीमियम सिंगल माल्ट व्हिस्की की मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
अग्रवाल के अनुसार, ‘प्रीमियमाइजेशन’ का मतलब केवल महंगे उत्पाद खरीदना नहीं है। उपभोक्ता बेहतर गुणवत्ता के लिए अधिक खर्च करने को तैयार हैं और उत्पादों की विशेषताओं को लेकर उनकी समझ भी बढ़ रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्राउन-फॉर्मन की रणनीति बड़े पैमाने पर बिकने वाले स्कॉच खंड में प्रतिस्पर्धा करने के बजाय प्रीमियम श्रेणी में अपनी जगह मजबूत करने की है।
भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता भी स्कॉच व्हिस्की बाजार के लिए अहम माना जा रहा है। समझौता 15 जुलाई, 2026 से प्रभावी होने के बाद ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया गया है। अगले दशक में इसे चरणबद्ध तरीके से 40 प्रतिशत तक लाने की योजना है।
आयात शुल्क में कमी से भारतीय बाजार में आयातित स्कॉच की कीमतों पर दबाव कम होने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद है।
ब्राउन-फॉर्मन भारत में केवल स्कॉच व्हिस्की तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी की योजना आने वाले समय में अपने आयरिश व्हिस्की उत्पादों के साथ जिन और टकीला जैसी श्रेणियों में भी अवसर तलाशने की है।


