रांची : राजधानी के शहरी क्षेत्र से 15 किमी की दूरी पर स्थित 780 एकड़ क्षेत्रफल में फैला बीआइटी मेसरा राज्य का ही नहीं बल्कि देश का भी गौरव है। वर्ष 1955 में ब्रज मोहन बिड़ला ने इसकी स्थापना की थी। इंस्टीट्यूट का मुख्य कैंपस मेसरा में है जबकि इलाहाबाद, जयपुर, कोलकाता, नोएडा, पटना, देवघर, लालपुर, मस्कट (ओमान) और दुबई में भी इसके कैंपस हैं।

15 जुलाई, 1955 में स्थापित बीआईटी मेसरा में बैचलर आफ इंजीनियरिंग (बीई) के छात्रों का पहला बैच 1960 में स्नातक हुआ था। इस उद्घाटन बैच के लिए नामांकन संख्या केवल 83 छात्रों, 8 संकाय सदस्यों, 3 विभागों और 2 कार्यक्रमों के साथ शुरू हुई, लेकिन संस्थान ने पिछले कुछ दशकों में संख्याबल में पर्याप्त वृद्धि की। अकेले मेसरा परिसर में संस्थान में लगभग 5500 छात्र, 355 संकाय, 19 विभाग और केंद्र और मेसरा परिसर में 40 कार्यक्रम संचालित हैं। इसके अलावे संस्थान के सभी केंद्रों में 10,000 से अधिक पंजीकृत छात्र हैं, जिनमें लगभग 400 डाक्टरेट छात्र भी शामिल हैं। संस्थान में प्रवेश अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा एवं अन्य प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम (मेरिट) के आधार पर होता है। प्रारंभिक वर्षों में संस्थान पटना विश्वविद्यालय से संबद्ध था। वर्ष 1960 में रांची यूनिवर्सिटी की स्थापना के बाद संस्थान की संबद्धता नई यूनिवर्सिटी के साथ हुई। बीआइटी मेसरा को यूजीसी से डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त है।
वर्ष 1986 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 के अनुभाग 3 के तहत इसको मानित यूनिवर्सिटी घोषित किया गया। इसे एनएएसी (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रडिटेशन काउंसिल) और एनबीए (नेशनल बोर्ड आफ एसोसिएशन) से भी मान्यता प्राप्त है।
बता दें कि बीआईटी ने देश को 20 हजार से अधिक स्नातक और करीब ढाई हजार से अधिक स्नातकोत्तर दिए हैं। आज देश भर के सभी केंद्रों में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या दस हजार और शोधार्थियों की संख्या 150 है।
वर्ष 2005 में एसी निलसन एवं इंडिया टुडे द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में इसे देश के टाप 10 श्रेष्ठ तकनीकी संस्थानों में शुमार किया गया। बीआइटी पहला इंस्टीट्यूट है जिसने 2000 में पहली बार देश के बाहर (बहरीन में) टेक्निकल यूनिवर्सिटी की स्थापना की है। सउदी अरब (यूएई) के दुबई स्थित कैंपस में अध्ययन के लिए बिहार और झारखंड के छात्रों को फीस में 50 प्रतिशत छूट मिलती है।बीआईटी मेसरा ने कई प्रतिष्ठित हस्तियों की मेजबानी की है, जिनकी यात्राओं ने छात्रों को प्रेरित किया है और शैक्षणिक माहौल को समृद्ध किया है। पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. जाकिर हुसैन, डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रणब मुखर्जी शिक्षा, विज्ञान और शासन पर अंतर्दृष्टि साझा कर चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय विकास में उच्च शिक्षा की भूमिका पर जोर दिया।
प्रख्यात विज्ञानी डाॅ. होमी जहांगीर भाभा और पूर्व इसरो अध्यक्ष डा. एस. सोमनाथ यहां छात्रों को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित कर चुके हैं। इन यात्राओं ने बीआइटी मेसरा में उत्कृष्टता, नेतृत्व और विज्ञानी जांच की संस्कृति को बढ़ावा देते हुए एक स्थायी प्रभाव छोड़ा है।
वर्तमान में झारखंड राज्य के छह आइएएस अफिसर्स आदित्य रंजन, नैंसी सहाय, वरुण रंजन, सुशक गौरव, नमन प्रियेश लकड़ा, आदित्य कुमार आनंद जैसे यहां के पूर्ववर्ती छात्र रह चुके हैं।
साथ ही आइपीएस अधिकारियों और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) ने संस्थान में अतिथि व्याख्यान दिए हैं। वहीं प्रबंधन विभाग ने सामाजिक उद्यमियों की विशेषता वाले व्याख्यान आयोजित किए, जो छात्रों को सामाजिक चुनौतियों को हल करने में नवीन दृष्टिकोण से परिचित कराते हैं।


