नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) और राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के अध्यक्षों को दोनों न्यायाधिकरणों के दैनिक कामकाज को बेहतर बनाने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे, भवनों और कर्मचारियों से संबंधित विस्तृत प्रस्ताव सौंपने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दोनों अधिकरणों के अध्यक्षों से चार सप्ताह के भीतर ये प्रस्ताव सौंपने को कहा।
पीठ ने कहा, ‘‘इन प्रस्तावों में जमीन/भवन के साथ-साथ आवश्यक कर्मचारियों की मांग को भी शामिल किया जा सकता हैं। एनसीएलटी इस बात पर भी विचार करेगा कि क्या न्यायिक रिकॉर्ड के रखरखाव के लिए हर पीठ पर उप पंजीयक या संयुक्त पंजीयक स्तर के अधिकारी की नियुक्ति उचित होगी।’’
पीठ ने कहा, ‘‘इन सभी जरूरतों की जांच कर उन्हें हमारे समक्ष प्रस्तुत किया जाए। अगर चार सप्ताह के भीतर जरूरी जानकारी इस अदालत तक पहुंचा दी जाए तो अच्छा होगा। साथ ही, अटॉर्नी जनरल केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहेंगे कि सभी बुनियादी सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाएं।’’
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी के यह सुझाव देने के बाद कि प्राथमिकताओं की पहचान करने के लिए अधिकरण के नेतृत्व और बार के साथ एक संयुक्त बैठक की जानी चाहिए, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से संबंधित हितधारकों के साथ बैठक करने को कहा।
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब अदालत को यह सूचित किया गया कि एनसीएलटी की प्रधान पीठ का बुनियादी ढांचा ‘‘चरमरा’’ रहा है, वहां दो मंजिलें बंद हैं और अदालतें अपनी आधी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया था कि वह एनसीएलटी अध्यक्ष के साथ परामर्श करके उन बुनियादी सुविधाओं की पहचान करे जिनकी एनसीएलटी की पीठों को तत्काल आवश्यकता है।


