दरअसल, आनंद मोहन अपने बड़े बेटे चेतन आनंद के तीसरे पाटलिपुत्र गन शूटिंग रेंज के उद्घाटन समारोह में शामिल होने रांची पहुंचे थे। इस दौरान उनकी पत्नी भी मौजूद थीं। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कई राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी की।

कमजोर विपक्ष पर उठाए सवाल, तानाशाही का खतरा बताया
आनंद मोहन ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष के साथ मजबूत विपक्ष का होना भी बेहद जरूरी है। झारखंड, बिहार और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की मौजूदा भूमिका से वह संतुष्ट नहीं हैं। उनके मुताबिक, जिस देश में प्रतिपक्ष कमजोर होगा, वहां तानाशाही का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र में मजबूत विपक्ष की जरूरत बताई।

नीतीश कुमार के फैसले से क्यों नाराज हैं आनंद मोहन?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में जाने के फैसले पर आनंद मोहन ने असंतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने नीतीश कुमार से अपनी नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि बिहार में अभी तीन महीने भी नहीं हुए थे और नीतीश कुमार केंद्र चले गए।
आनंद मोहन ने नीतीश कुमार के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में बिहार विकास की दिशा में आगे बढ़ा। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार का राजनीतिक अनुभव और कद काफी बड़ा है।
झारखंड को लेकर ऐसा क्यों बोले आनंद मोहन?
झारखंड के विकास पर टिप्पणी करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि अलग राज्य बनने के बाद भी यहां अपेक्षित विकास नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड नेताओं और पूंजीपतियों की लूट का अड्डा बन गया है।
उन्होंने कहा कि झारखंड में खनिज संपदा से लेकर कृषि तक विकास के पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, फिर भी राज्य अपेक्षित मुकाम हासिल नहीं कर पाया। उन्होंने अलग राज्य के गठन को झारखंड का निर्माण नहीं, बल्कि बिहार का विभाजन बताया। हालांकि, ये उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणियां हैं।
सम्राट चौधरी की नीतीश कुमार से तुलना पर भी दी राय
बिहार की राजनीति में नेतृत्व के सवाल पर आनंद मोहन ने सम्राट चौधरी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के समय उन्होंने सम्राट चौधरी को बेहतर विकल्प बताया था। लेकिन साथ ही साफ किया कि उम्र, अनुभव और राजनीतिक कद के मामले में सम्राट चौधरी की तुलना नीतीश कुमार से नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार का राजनीतिक अनुभव बहुत बड़ा है।
अनंत सिंह के समर्थन में उतरे, संजय झा पर भी साधा निशाना
अनंत सिंह पर हुई कार्रवाई को लेकर आनंद मोहन ने इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि अनुशासन तोड़ने वाले दूसरे लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। अनंत सिंह को उन्होंने अपने समाज का हीरो बताया।
वहीं, संजय झा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वह उनके बराबर नहीं हैं और वह उनकी चर्चा करना भी पसंद नहीं करते।
रोहिणी आचार्य और बांकीपुर चुनाव पर क्या बोले?
रोहिणी आचार्य को लेकर आनंद मोहन ने उन्हें बच्ची और बेचारी बताया। वहीं, बांकीपुर के चुनावी नतीजों और एमएलसी चुनाव पर उन्होंने कहा कि इन परिणामों के पीछे कई राजनीतिक और सामाजिक फैक्टर काम कर रहे थे।
उन्होंने यूजीसी, जेन-जी और आनंद मोहन को सुप्रीम कोर्ट में घसीटे जाने जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। बांकीपुर के नतीजों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, ‘तू किसी और से ना हारेगा, तुझे तेरा अहंकार मारेगा।’
NDA और JDU को दी आत्ममंथन की सलाह
प्रेस वार्ता के आखिर में आनंद मोहन ने एनडीए और जेडीयू को आत्ममंथन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी नतीजों को देखते हुए दोनों को अपनी रणनीति पर विचार करना चाहिए।
कुल मिलाकर रांची में आनंद मोहन की प्रेस वार्ता में बिहार की सत्ता, विपक्ष की भूमिका, झारखंड का विकास और अनंत सिंह पर कार्रवाई जैसे मुद्दे छाए रहे। उनके बयानों ने एक बार फिर बिहार और झारखंड के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।


