केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ और अन्य राज्यों के बीच कैदियों के तबादले की मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस एवं सुधार सेवा अधिनियम लागू किया, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच कैदियों के तबादले का रास्ता साफ हुआ।

Archana Ekka
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नयी दिल्ली : केंद्र सरकार ने ‘पंजाब पुलिस एंड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2006’ को केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में लागू कर दिया है, जिसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच कैदियों के तबादले और जेल प्रशासन के कामकाज में बदलाव से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, ‘पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966’ की धारा 87 के तहत यह अधिसूचना जारी की गई है। इसके जरिए पंजाब के कानून को कुछ संशोधनों के साथ केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में लागू किया गया है।

इन संशोधित प्रावधानों में चंडीगढ़ और अन्य राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के बीच कैदियों के तबादले की व्यवस्था की गई है।
इन प्रावधानों के तहत, चंडीगढ़ में सजा काट रहे कैदियों (जिनमें आजीवन कारावास की सजा पाने वाले भी शामिल हैं) को संबंधित सरकार की सहमति और चंडीगढ़ प्रशासक के आदेश से किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की जेल में भेजा जा सकता है। इन संशोधनों में यह भी व्यवस्था है कि चंडीगढ़ की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने या जनहित के लिए विचाराधीन कैदियों को भी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में भेजा जा सकता है, बशर्ते उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार इसके लिए सहमत हो।

अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘यदि कोई कैदी चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश की किसी जेल में कारावास या मृत्युदंड काट रहा है, या जुर्माना न भरने, शांति बनाए रखने के लिए मुचलका न देने या अच्छा आचरण न रखने के कारण जेल में बंद है, तो सरकार संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार की सहमति से, आदेश जारी करके ऐसे कैदी को उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की जेल में भेज सकती है। इसी तरह, किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की जेल से किसी कैदी को चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश की जेल में भी भेजा जा सकता है।’’ विचाराधीन कैदियों के मामले में, इन संशोधनों के तहत उनका तबादला चंडीगढ़ से किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित सरकारों की सहमति और उस अदालत की मंजूरी जरूरी होगी, जहां उनका मुकदमा चल रहा है।

इन संशोधनों में यह भी प्रावधान है कि ‘नो-फ्लाई जोन’ (उड़ान निषेध क्षेत्र) में किसी भी हवाई वस्तु (जैसे ड्रोन आदि) को केवल तभी उड़ाया जा सकता है, जब नागरिक उड्डयन कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति मिल जाए और संबंधित विभाग से पूर्व मंजूरी ले ली गई हो।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सन्मार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।