
पुष्यमित्र
बिहार: यह कहानी बिहार के एक सरकारी आवास की है, जिसे 5, देशरत्न मार्ग के नाम से जाना जाता है। अब तक यह आवास राज्य के उप मुख्यमंत्री के लिए रिजर्व हुआ करता था। मगर जब सम्राट चौधरी उप मुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री बने तो उन्हें कई तरह के विवादों के बाद इस आवास को छोड़ना पड़ा और अब यह आवास किसी डिप्टी सीएम को नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के पुत्र राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत को अलॉट किया गया है।
इस बंगले की खासियत आप पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी की एक टिप्पणी से समझ सकते हैं, 2019 में जब उन्हें यह आवास अलॉट किया गया था, तब उन्होंने कहा था, “इस बंगले के आगे तो राजभवन और मुख्यमंत्री आवास भी फीका है।” आप समझ सकते हैं कि क्यों सम्राट चौधरी सीएम बनने के बाद भी इस बंगले को खाली नहीं करना चाहते थे। उन्होंने इस बंगले को सीएम हाउस का एक्सटेंशन घोषित कर दिया था।
अब जरा इस बंगले की खासियत को समझिए, पांच कमरे वाले इस दोमंजिला आवास में 44 एसी लगे हैं, कुछ एसी तो बाथरूम तक में लगे हैं। ब्रिज कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने यहां 59 लाख के फर्नीचर लगाए हैं। इस बंगले में लेदर वाले 35 काफी महंगे सोफे लगे हैं। एक्सक्लूसिव डिजाइन वाले 108 पंखे लगे हैं, इतने एसी और पंखे लगे कहां होंगे यह समझ नहीं आता। खैर, 34 दीवारों पर वुडेन पैनल लगा है। 464 फैंसी LED लाइट लगे हैं, जिन्हें विदेश से मंगवाया गया है। कमरों की वुडन फ्लोरिंग की गई है।
दिलचस्प है कि यह सब जानकारी सुशील मोदी ने 2019 में खुद मीडिया को दी थी, जब अदालती लड़ाई के बाद तेजस्वी यादव को यह बंगला छोड़ना पड़ा था और बंगला उन्हें अलॉट किया गया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि इस बंगले के रिनोवेशन में पुल निर्माण निगम ने करोड़ों की राशि खर्च की थी, जब बंगला भवन निर्माण विभाग के अधीन है।
अब समझिए कि हमारे प्रतिनिधि जो खुद को लोक सेवक भी कहते हैं, उनके बंगले कैसे होते हैं। 5, देशरत्न मार्ग तो बस एक उदाहरण है। और हां, यह भी समझ लीजिए कि इसी बिहार में 41 फीसदी परिवारों के पास पक्का मकान भी नहीं है। इनमें 14 फीसदी झोपड़ियों में रहते हैं और 63 हजार से अधिक परिवार बेघर हैं।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

