बीजापुर (छत्तीसगढ़): झारखंड में सक्रिय 49 लाख रुपये के इनामी आठ नक्सलियों ने बुधवार को छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने यह जानकारी दी। सरकार द्वारा 31 मार्च को राज्य को नक्सलवाद से मुक्त घोषित करने के बाद यह छत्तीसगढ़ में माओवादियों का पहला बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण है। बीजापुर के पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता ने बताया कि पांच महिलाओं सहित आठ नक्सलियों ने बीजापुर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

गुप्ता ने कहा कि ये लोग छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सली आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति तथा बीजापुर में की जा रही पुनर्वास पहल से प्रभावित थे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव, गैरकानूनी संगठन की कमजोर संगठनात्मक संरचना, इसकी हिंसक और जनविरोधी विचारधारा से मोहभंग, पूर्व माओवादियों के सफल पुनर्वास एवं आदिवासी क्षेत्रों में तेजी से विकास के कारण नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।

अधिकारी ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली कई वर्षों से प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) से जुड़े थे और पड़ोसी राज्य झारखंड के विभिन्न इलाकों में सक्रिय थे।
गुप्ता ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों में अश्विन उर्फ लच्छू (30), रंगा उर्फ सोहन (30) और डोबा माडवी उर्फ राहत (25) पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था।
उन्होंने बताया कि फगनी पोयम उर्फ रजनी (28), सूरज मुन्नी चंपिया (25), हिडमे कड़ती उर्फ रीता (27), बुधरी कुंजम उर्फ अनुषा (25) और सलमी चंपिया उर्फ जिलानी (20) पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम था। गुप्ता ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के निवासी हैं।


