
हर साल की तरह इस बार भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून 2026) का उद्देश्य बेहद महत्वपूर्ण और आज के समय के हिसाब से प्रासंगिक माना जा रहा है। डा. परिणीता सिंह ने कहा कि योग का जो सिद्धांत हजारों साल पहले ऋषि-मुनियों ने दिया था, वह आज भी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र सभी के लिए उपयोगी है।इस वर्ष का विषय “योगा फॉर वेलनेस, विजडम एंड वर्ल्ड पीस” (स्वास्थ्य, ज्ञान और विश्व शांति) है। डा. सिंह के अनुसार यह पूरा विचार अष्टांग योग या राजयोग पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आज के समय में बेहतर स्वास्थ्य के लिए शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक संतुलन जरूरी है।
इसके लिए आसन और प्राणायाम को बेहद अहम बताया गया। इनके जरिए व्यक्ति अपने स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बना सकता है। वहीं ज्ञान की प्राप्ति के लिए अष्टांग योग के अंतरंग अभ्यास-धारणा और ध्यान को अपनाने पर जोर दिया गया, जिससे विचार स्पष्ट होते हैं और विवेक विकसित होता है। डा. परिणीता सिंह ने कहा कि विश्व शांति के लिए यम और नियम का पालन सबसे जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि व्यक्ति पांच यम में से किसी एक का भी पालन करता है, तो उसका प्रभाव समाज पर गहराई से पड़ता है।
उन्होंने महर्षि पतंजलि के योगसूत्र का उल्लेख करते हुए कहा- “अहिंसाप्रतिष्ठायां तत्सन्निधौ वैरत्यागः” (योगसूत्र 2/35)
इसका अर्थ है कि अहिंसा के स्थापित होने पर वैरभाव स्वतः समाप्त हो जाता है। इसी तरह सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह को अपनाकर व्यक्ति और राष्ट्र अपने जीवन में संतुलन और संतोष प्राप्त कर सकते हैं। वहीं शौच, संतोष, स्वाध्याय, तप और ईश्वर प्रणिधान जैसे नियम न सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति में मदद करते हैं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य भी बनाते हैं।
अंत में उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक का उल्लेख किया- “योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः…” (गीता 5/7)
जिसका भाव यह है कि जो व्यक्ति इंद्रियों पर नियंत्रण रखता है और आत्मिक रूप से शुद्ध होता है, वह कर्म करते हुए भी उससे प्रभावित नहीं होता और सच्चे अर्थों में स्थितप्रज्ञ बना रहता है।

