‘हिंदी भारत मां की बिंदी है’, जमशेदपुर में डॉ. जेबी पाण्डेय ने बताया भाषा का महत्व

जमशेदपुर में हिंदी पखवाड़े पर कार्यशाला, डॉ. जेबी पाण्डेय ने हिंदी को भारत मां की बिंदी बताया और वैश्विक पहचान पर जोर देते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।

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जमशेदपुर: एसएस अकादमी जमशेदपुर के तत्वावधान में हिंदी पखवाड़े के अवसर पर हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भाषा केवल अपनी बात कहने का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी देश की पहचान और अस्मिता से भी जुड़ी होती है। उन्होंने कहा, “हिंदी भारत मां की बिंदी है।” डॉ. पाण्डेय ने हिंदी के महत्व को समझाते हुए कहा कि बिछुआ हजार रुपये में मिलता है, लेकिन वह पैरों में पहना जाता है। वहीं बिंदी एक रुपये में मिल जाती है, लेकिन मां के माथे पर उसकी अलग ही शोभा होती है। इसी तरह हिंदी भारत की बिंदी है। उन्होंने कहा कि हिंदी राजभाषा और राष्ट्रभाषा दोनों है। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान निर्माताओं ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। 26 नवंबर 1949 को संविधान बनकर तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया। इसके बाद से हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

डॉ. पाण्डेय ने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए अब तक 12 विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 10 से 12 जनवरी 1975 तक नागपुर में हुआ था, जबकि 12वां विश्व हिंदी सम्मेलन 15 से 17 फरवरी 2023 तक फिजी के नादी शहर में आयोजित किया गया। इन दोनों विश्व हिंदी सम्मेलनों में भारत के प्रतिनिधि के रूप में शामिल होने का अवसर डॉ. पाण्डेय को मिला था। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदी सम्मेलनों ने हिंदी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। अब हिंदी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि सात समंदर पार भी अपनी पहचान बना रही है। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि हिंदी अब विश्व का तोरण द्वार बन चुकी है। उन्होंने हिंदी की विशेषता को इन पंक्तियों के माध्यम से भी सामने रखा-

केश है कंघा है कच्छा कड़ा सिख धर्म के हाथ कटार है हिंदी

बात करो दिन रात जहाँ मन, चाहे बेतार का तार है हिंदी

पूजा से पूर्व पुरोहित हाथ, सजाई हुई यह थाल है हिंदी

  संस्कृति और संस्कार लिए हुई, विश्व का तोरण द्वार है हिंदी

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वाईबीएन विश्वविद्यालय, रांची के इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा और राष्ट्रभाषा दोनों है। उन्होंने लोगों से अपनी भाषा में काम करने की अपील की। इस दौरान उन्होंने हिंदी पर एक सारगर्भित कविता भी सुनाई, जिसे सुनकर उपस्थित श्रोता भाव-विभोर हो गए।

हिन्द देश की अपनी भाषा हिंदी है

हिन्द देश की प्यारी भाषा हिंदी है

  है सिर का यह मुकुट कान का कुंडल है

हार गले का है, माथे की बिंदी है

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपनी सद्य:प्रकाशित पुस्तक ‘भगवान हनुमान’ विद्यालय के अध्यक्ष श्री मथुरा सिंह को भेंट की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष श्री मथुरा सिंह ने कहा कि हिंदी एक सरल और सहज भाषा है और हमें अपनी भाषा पर गर्व है।

इस अवसर पर डॉ. जेबी पाण्डेय ने विद्यालय अध्यक्ष मथुरा सिंह, उनकी धर्मपत्नी और सुपुत्र प्रिंस सिंह को सुंदरकांड की प्रति भेंट कर सम्मानित किया। वहीं विदुषी प्राचार्या डॉ. लता मानकर को ‘सर्वोत्तम प्राचार्य’ का प्रमाण पत्र दिया गया। हिंदी में उत्कृष्ट कार्य के लिए सागर सतपथी और रूबी पाण्डेय को ‘हिंदी रत्न सम्मान’ से नवाजा गया। उपस्थित लोगों ने करतल ध्वनि के साथ सम्मान का स्वागत किया। कार्यक्रम में विद्यालय का हॉल शिक्षक-शिक्षिकाओं, अभिभावकों और विद्यार्थियों से खचाखच भरा रहा। सभी ने डॉ. जेबी पाण्डेय के संबोधन को बड़े ध्यान से सुना।

इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को मंचस्थ अतिथियों ने प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। विद्यालय के संगीत शिक्षक राकेश राणा ने अपनी संगीत प्रस्तुति से कार्यक्रम में रंग भर दिया और दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत विदुषी प्राचार्या डॉ. लता मानकर ने किया। छात्राओं ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। हिंदी शिक्षक सागर सतपथी ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया, जबकि रूबी पाण्डेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। अंत में राष्ट्रगान और शांति पाठ के साथ हिंदी कार्यशाला एवं संगोष्ठी का समापन हुआ।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।