रांची: झारखंड में 108 एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। स्वास्थ्य विभाग और सरकार की ओर से मिले 15 से 20 दिनों के आश्वासन की समय-सीमा पूरी होने के बाद भी समाधान न निकलने पर कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।

झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ (भारतीय मजदूर संघ से सम्बद्ध) के बैनर तले मंगलवार को धुर्वा में एक अहम बैठक बुलाई गई। जिसकी अध्यक्षता संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी और संचालन महामंत्री सूरज साहू ने किया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मांगों पर ठोस कार्रवाई न होने के विरोध में 6 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत की जा रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि 16 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के साथ हुई वार्ता में 15 से 20 दिनों के भीतर समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिया गया था। समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
संघ की प्रमुख मांगों में 108 एम्बुलेंस सेवा का सीधे सरकारी स्तर पर संचालन, सिविल सर्जन के माध्यम से वेतन का भुगतान, ‘सम्मान फाउंडेशन’ द्वारा हटाए गए कर्मियों की ससम्मान वापसी तथा ईपीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन जैसे वैधानिक अधिकारों की गारंटी शामिल है। संघ के महामंत्री सूरज साहू ने स्पष्ट किया कि इस बार कोरे आश्वासनों पर आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
जारी कार्यक्रम के अनुसार, 6 से 9 अक्टूबर तक सभी कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे। इसके बाद 9 अक्टूबर की शाम सिविल सर्जन कार्यालय से उपायुक्त कार्यालय तक कैंडल मार्च निकाला जाएगा। 12 अक्टूबर को सिविल सर्जन कार्यालयों के समक्ष भिक्षाटन और 14 अक्टूबर को विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित होगा।
यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो 16 अक्टूबर को पूरे राज्य में एक दिवसीय पूर्ण हड़ताल रहेगी तथा रांची के नामकुम स्थित एनएचएम (NHM) कार्यालय का घेराव किया जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर 21 अक्टूबर से पूरे झारखंड में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


