झारखंड में डॉक्टरों का काला फीता बांधकर विरोध प्रदर्शन शुरू, 21 अक्टूबर तक चलेगा आंदोलन

झारखंड में डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर काला बैज पहनकर विरोध शुरू किया है। आंदोलन 21 अक्टूबर तक चलेगा। मांगें नहीं मानी गईं तो हड़ताल की चेतावनी दी है।

News Aroma
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रांची: झारखंड में विभिन्न चिकित्सा संगठनों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के आह्वान पर डॉक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। राज्य भर के सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टर 13 अक्टूबर से काले रंग के बैज बांधकर ड्यूटी कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन आगामी 21 अक्टूबर तक जारी रहेगा। यदि इस अवधि के दौरान सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो डॉक्टर हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे।

रिम्स में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) समेत कई संगठनों के बैनर तले डॉक्टरों ने सामूहिक शक्ति प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में IMA, JSHSA, FAIMA, JDA, JDN और अन्य चिकित्सक संगठन एकजुट होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।

आंदोलन की अगली रणनीति और अपनी मुख्य मांगों को मीडिया के सामने रखने के लिए 14 अक्टूबर बुधवार को सुबह 11 बजे रिम्स, रांची के रिम्सोनियन हॉल में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई है। इसमें राज्य के वरिष्ठ, कनीय और प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर एक साथ शामिल होकर अपनी बात रखेंगे।

IMA की अपील

IMA झारखंड के राज्य महासचिव डॉ. प्रदीप सिंह और अन्य पदाधिकारियों ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, निजी अस्पतालों के मालिकों और डॉक्टरों से अपील की है कि वे 21 अक्टूबर तक अपने-अपने संस्थानों में हर डॉक्टर को काला बैज लगाना सुनिश्चित करें। इसके लिए अस्पतालों के रिसेप्शन पर ही काले रिबन की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है ताकि डॉक्टरों को इसे पहनने में आसानी हो। जिला IMA के अध्यक्षों और सचिवों को भी इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ये हैं प्रमुख मांगें

डॉक्टरों की मुख्य मांगों में डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डायनेमिक एसीपी) को लागू करना, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में आवश्यक संशोधन करना तथा डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट’ का निर्माण शामिल है। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों के बकाया भुगतान व दरों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की भी मांग की जा रही है।

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