
Chandil Murder Case : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल में वर्ष 2019 में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की निर्मम हत्या के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को रद्द करते हुए आरोपी चुन्नू मांझी उर्फ पुटरू को दोषमुक्त कर दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से दायर डेथ रेफरेंस याचिका भी खारिज कर दी गई।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। अदालत ने माना कि जांच और साक्ष्यों में कई ऐसी कमियां और विरोधाभास मौजूद हैं, जिनके आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते, बल्कि उन्हें ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से सिद्ध करना आवश्यक होता है।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने जांच से जुड़े कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने मामले को संदेहास्पद बना दिया। जांच अधिकारी ने बयान दिया था कि शव घर के कमरे से बरामद किए गए थे, जबकि पंचनामा रिपोर्ट में शवों के आंगन से मिलने की बात दर्ज थी। घटना स्थल को लेकर इस विरोधाभास ने जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।
अदालत ने यह भी पाया कि पुलिस द्वारा जब्त की गई कुल्हाड़ियों की सूची में कहीं भी खून के धब्बों का उल्लेख नहीं था, जबकि बाद में जांच अधिकारी ने दावा किया कि आरोपी के हाथ में खून से सनी कुल्हाड़ी थी। इसके अलावा जब्ती सूची और फॉरेंसिक जांच के दस्तावेजों में भी कई असंगतियां सामने आईं, जिससे साक्ष्यों की प्रमाणिकता संदिग्ध हो गई।
गौरतलब है कि चुन्नू मांझी पर अपने रिश्तेदार रवि मांझी, उनकी पत्नी कल्पना और तीन बच्चों की टांगी से हत्या करने का आरोप था। इस मामले में निचली अदालत ने सितंबर 2025 में उसे दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने अब उस फैसले को निरस्त कर दिया है।
अदालत ने आदेश दिया है कि यदि चुन्नू मांझी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए। इस फैसले के बाद न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्ष जांच और मजबूत साक्ष्यों की आवश्यकता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय आपराधिक मामलों में साक्ष्यों की गुणवत्ता और जांच की पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करता है।

